नई दिल्ली। देशभर में सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि ऐसे हादसों में घायल होने वाले लोगों और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई जाए। जरूरत पड़ने पर मौजूदा कानूनों और नियमों में संशोधन भी किया जाए।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आवारा पशुओं को राष्ट्रीय राजमार्गों, शहरों की सड़कों और गलियों में यूं ही नहीं छोड़ा जा सकता। वे कोई “नेचुरल स्पीड ब्रेकर” नहीं हैं। अदालत ने कहा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए और ऐसे हादसों को रोका जाए।सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी पंजाब के संगरूर निवासी निशा की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका के अनुसार, 21 सितंबर 2007 को उनके पति विजय सड़क पर पैदल जा रहे थे, तभी एक आवारा सांड ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर पीड़िता को 15 लाख रुपये का मुआवजा दे। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश को भविष्य के सभी मामलों में स्वतः लागू होने वाली मिसाल (नजीर) नहीं माना जाएगा।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आवारा पशुओं की समस्या का सबसे बड़ा कारण यह है कि जब पशु आर्थिक रूप से अनुपयोगी हो जाते हैं, तो उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पशुपालकों की जिम्मेदारी केवल पशु पालने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पूरे जीवन की देखभाल करना भी उनकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश अपने पशु की देखभाल नहीं कर सकता, तो उसे गौशाला या किसी अधिकृत पशु आश्रय गृह में सौंपना चाहिए, न कि उसे सड़क पर छोड़ देना चाहिए।अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को सुझाव दिया कि आवारा पशुओं से होने वाले हादसों के पीड़ितों को समयबद्ध मुआवजा देने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए। इसके लिए आवश्यक होने पर संबंधित कानूनों और नियमों में संशोधन किया जाए, ताकि भविष्य में पीड़ितों को न्याय पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब देश के कई राज्यों में आवारा पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अदालत ने संकेत दिया कि इस समस्या के समाधान के लिए सरकारों, स्थानीय निकायों और पशुपालकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।














