रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 1.0 के तहत छत्तीसगढ़ में स्वीकृत करीब 14 हजार आवास अब भी अधूरे पड़े हैं। अब इन आवासों को पूरा करने के लिए सरकार ने सितंबर तक की अंतिम समय-सीमा तय की है। सितंबर के बाद अधूरे आवासों के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली राशि नहीं दी जाएगी।
सितंबर के बाद निकायों को अपने खर्च पर पूरा करना होगा काम
राज्य शासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि सितंबर के बाद योजना के अधूरे कार्यों के लिए कोई समयवृद्धि नहीं दी जाएगी। यदि तय समय तक निर्माण पूरा नहीं होता है, तो संबंधित नगरीय निकायों को अपने ही बजट से शेष काम पूरा करना होगा। लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
2.06 लाख से ज्यादा आवास स्वीकृत
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत कुल 2,06,118 आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 1,91,819 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि करीब 14 हजार आवास अब भी लंबित हैं।
लंबित आवासों में:
- 14 नगर निगमों के 2,671 आवास
- 55 नगर पालिकाओं के 5,607 आवास
- 97 नगर पंचायतों के 5,886 आवास शामिल हैं।
1,200 से ज्यादा मकानों की सिर्फ नींव बनी
सबसे गंभीर स्थिति धमतरी, रिसाली, राजनांदगांव, बिलासपुर, रायपुर और भिलाई की बताई गई है। यहां एएचपी यानी अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप घटक के तहत स्वीकृत 1,200 से अधिक आवासों में केवल नींव और आधार संरचना तैयार हो सकी है।
60% केंद्र और 40% राज्य की हिस्सेदारी
योजना के तहत आवास निर्माण में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन सितंबर की समय-सीमा के बाद अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी संबंधित नगरीय निकायों की होगी।
हर सप्ताह होगी काम की समीक्षा
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने निर्माणाधीन आवासों को सितंबर तक पूरा कराने के लिए साप्ताहिक लक्ष्य तय कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से योजना की लगातार समीक्षा की जा रही है।
यानी अब सितंबर की डेडलाइन इन 14 हजार अधूरे आवासों के लिए बेहद अहम है। समय पर निर्माण पूरा नहीं हुआ तो सरकारी फंडिंग रुक सकती है और आगे का खर्च नगरीय निकायों को अपने मद से उठाना पड़ेगा।














