इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने मेघालय सरकार की अपील स्वीकार करते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी और तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले का ट्रायल छह महीने के भीतर पूरा किया जाए। अदालत ने कहा कि यदि तय समय में सुनवाई पूरी नहीं होती है, तो सोनम रघुवंशी दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं।
हाईकोर्ट ने पहले बरकरार रखी थी जमानत
इससे पहले 30 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए सोनम रघुवंशी को मिली जमानत बरकरार रखी थी। हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई बहस?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील से पूछा था कि क्या उनकी मुवक्किल स्वेच्छा से सरेंडर करेंगी या अदालत जमानत रद्द करने का आदेश दे। जवाब में सोनम की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।वहीं मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि गिरफ्तारी मेमो में धारा 103 की जगह गलती से धारा 403 लिख दी गई थी, जो केवल टाइपिंग की त्रुटि थी। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर हत्या जैसे गंभीर मामले में जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
मेघालय सरकार का दावा
सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि राजा रघुवंशी की शादी के बाद हनीमून के दौरान सुनियोजित तरीके से हत्या की गई। आरोप है कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी और उसके साथियों के साथ मिलकर वारदात की साजिश रची। जांच के अनुसार पहले हत्या की गई और फिर शव को खाई में फेंका गया।सरकार ने यह भी आशंका जताई कि जमानत पर रहने की स्थिति में सोनम के फरार होने की संभावना है। इसी आधार पर जमानत रद्द करने की मांग की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।अब अदालत के आदेश के अनुसार सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा, जबकि मामले की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।














