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राहुल गांधी के धरने पर बैठते ही मोदी सरकार के मंत्री तुरंत बातचीत करने क्यों पहुंचे? अचानक बदली रणनीति ने बढ़ाई सियासी हलचल

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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर अचानक धरने पर बैठने से राजधानी की राजनीति में हलचल तेज हो गई। राहुल गांधी के इस अप्रत्याशित कदम के बाद केंद्र सरकार भी तुरंत सक्रिय नजर आई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन राहुल गांधी से बातचीत करने के लिए मौके पर पहुंचे। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर राहुल गांधी के धरने पर बैठते ही सरकार को इतनी जल्दी बातचीत की जरूरत क्यों महसूस हुई?राहुल गांधी मंगलवार को अचानक 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचे और कांग्रेस सांसदों के साथ धरने पर बैठ गए। उनके इस कदम की जानकारी पहले से सार्वजनिक नहीं थी। यहां तक कि मीडिया को भी इसकी जानकारी राहुल गांधी के धरने पर बैठने के बाद ही मिली।राहुल गांधी के इस कदम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उस समय विपक्ष के कई नेता जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सोनम वांगचुक से जुड़े आंदोलन को लेकर विपक्षी नेताओं की सक्रियता बनी हुई थी। इसी दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने का फैसला लेकर सियासी रणनीति को अचानक एक नया मोड़ दे दिया।

राहुल गांधी

धरने की खबर मिलते ही सरकार हुई सक्रिय

राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठने के कुछ ही समय बाद केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह उनसे बातचीत करने पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन भी मौजूद थे।सरकार की ओर से राहुल गांधी से धरना समाप्त करने की अपील की गई। सरकार का तर्क था कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने से आम लोगों को असुविधा हो सकती है और यह स्थान प्रदर्शन के लिए निर्धारित नहीं है।हालांकि, राहुल गांधी ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने कई मुद्दे रखे। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकार छात्रों और युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर संसद में चर्चा से बच रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही की मांग भी उठाई।

क्या सरकार को राहुल के अचानक कदम का अंदाजा नहीं था?

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राहुल गांधी के अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचने के बाद सरकार इतनी तेजी से बातचीत के लिए क्यों पहुंची? दरअसल, राहुल गांधी का यह कदम विपक्ष की उस रणनीति से अलग था, जिसमें विपक्षी नेता जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे।राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की। इससे सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई। एक तरफ संसद का मानसून सत्र चल रहा है, जहां विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ संसद के बाहर भी विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं।ऐसे में सरकार की ओर से तत्काल बातचीत की पहल को राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों नजरिए से देखा जा रहा है।

जंतर-मंतर पर भी विपक्ष की सक्रियता

इस बीच जंतर-मंतर पर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे। विपक्ष के कई नेता सोनम वांगचुक से जुड़े मुद्दों और छात्रों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में राहुल गांधी का जंतर-मंतर से अलग प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठना विपक्ष की रणनीति में एक अलग राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ सकता है टकराव

राहुल गांधी के धरने के बाद जिस तरह से सरकार के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी उनसे बातचीत करने पहुंचे, उससे साफ है कि सरकार भी इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेना चाहती। हालांकि, बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

कांग्रेस लगातार छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रही है, जबकि सरकार का कहना है कि संसद में चर्चा के लिए उचित संसदीय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी के इस अचानक धरने के बाद विपक्ष की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या सरकार संसद के भीतर इन मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार होती है।

फिलहाल, राहुल गांधी का अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना और उसके तुरंत बाद सरकार की बातचीत की पहल ने एक बात साफ कर दी है कि मानसून सत्र सिर्फ संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि सड़क पर भी सियासी टकराव का गवाह बनने जा रहा है।

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