इंदौर/ओंकारेश्वर | मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर स्थित 108 फीट ऊंची आदि शंकराचार्य की ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ एक बार फिर विवादों में है। प्रतिमा के निर्माण में तकनीकी खामियों के आरोपों और शिकायत करने वाले अधिकारियों को पद से हटाए जाने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में प्रतिमा को सहारा देने वाला मुख्य पिलर निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप मजबूत नहीं है। परियोजना से जुड़े तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी और प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल अनुपम गुप्ता ने दावा किया है कि उन्होंने करीब छह महीने पहले संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को तकनीकी खामियों से अवगत कराया था, लेकिन सुधार करने के बजाय उन्हें ही पद से हटा दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्ट्रक्चरल विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार मुख्य पिलर पर तय सीमा से अधिक दबाव दर्ज किया गया है। उनका दावा है कि भविष्य में तेज हवाओं के दौरान प्रतिमा के आगे की ओर झुकने की आशंका हो सकती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रतिमा का निर्माण विशेषज्ञों की निगरानी में निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया गया है और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया गया। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए निर्माण कार्य में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। फिलहाल, तकनीकी खामियों के आरोप और अधिकारियों को हटाए जाने के कारण यह मामला चर्चा में है। यदि आवश्यक हुआ तो आगे की जांच या विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।














