जबलपुर। सोशल मीडिया के दौर में अपनी बात खुलकर रखने वाली नई पीढ़ी का तेवर अब स्कूलों में भी नजर आने लगा है। जबलपुर जिले के पाटन में सांदीपनि विद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राएं नियमित बस सेवा की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। विद्यार्थियों ने मंगलवार को जबलपुर-पाटन मार्ग पर बैठकर प्रदर्शन किया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात प्रभावित हुआ। दरअसल, सांदीपनि विद्यालय का संचालन पाटन बस्ती से करीब 10 किलोमीटर दूर सकरा गांव में किया जा रहा है। पाटन और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां पढ़ने पहुंचते हैं। स्कूल की दूरी अधिक होने के बावजूद विद्यार्थियों के लिए नियमित बस सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसी परेशानी को लेकर लंबे समय से छात्र और अभिभावक परिवहन व्यवस्था शुरू करने की मांग कर रहे थे।

बस नहीं मिली तो सड़क पर बैठ गए छात्र
मंगलवार को विद्यार्थियों का सब्र टूट गया और सैकड़ों छात्र-छात्राएं एकजुट होकर पाटन-जबलपुर रोड पर पहुंच गए। छात्रों ने सड़क पर बैठकर नियमित बस सुविधा शुरू करने की मांग की। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के सड़क पर उतरने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। छात्रों का कहना है कि स्कूल आने और छुट्टी के बाद घर लौटने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। कई विद्यार्थियों को लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ता है या फिर अनियमित परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे रोजाना स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है।
पुलिस के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया। कुछ देर बाद एसडीएम मानवेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द बस सुविधा शुरू कराने का आश्वासन दिया। प्रशासन की ओर से मिले भरोसे के बाद विद्यार्थियों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सड़क खाली कर दी। इसके बाद धीरे-धीरे यातायात व्यवस्था सामान्य हो गई।
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छात्रों को अब आश्वासन नहीं, बस का इंतजार
विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि परिवहन की समस्या कोई नई नहीं है। स्कूल तक पहुंचने के लिए रोजाना करीब 10 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है, लेकिन नियमित बस सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों को काफी दिक्कत होती है। अब प्रशासन के आश्वासन के बाद विद्यार्थियों की नजर इस बात पर है कि बस सेवा वास्तव में कब शुरू होती है। छात्रों का कहना है कि सड़क पर उतरना उनका उद्देश्य नहीं था, लेकिन लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्हें प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा। GEN Z के बाद अब GEN Alpha की आवाज सड़क तक पहुंच गई है। सवाल सिर्फ बस का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों विद्यार्थियों की रोजाना की सुरक्षित और सुगम यात्रा का है, जो पढ़ने के लिए घर से करीब 10 किलोमीटर दूर जाते हैं।














