गुना। लंबे इंतजार के बाद मंगलवार को हुई तेज बारिश ने एक ओर जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी, वहीं दूसरी ओर कुछ ही घंटों में शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। इस सीजन की तेज बारिश के बाद नानाखेड़ी, गोविंद गार्डन, पटेल नगर, नई सड़क, पत्रकार कॉलोनी, कंट्रोल रूम, भगत सिंह कॉलोनी समेत कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। कई जगह सड़कों पर पानी भर गया, जबकि कुछ घरों और दुकानों में भी बारिश का पानी घुस गया। मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुई बारिश शाम तक जारी रही। जानकारी के मुताबिक सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक गुना शहर में करीब 84 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं करीब तीन घंटे में ही तीन इंच से ज्यादा बारिश होने की बात सामने आई है। तेज बारिश के बाद नाले उफान पर आ गए और कई इलाकों में पानी की निकासी नहीं हो सकी।

नानाखेड़ी में सड़क बनी तालाब, दुकानों और घरों में घुसा पानी
बारिश का सबसे ज्यादा असर नानाखेड़ी क्षेत्र में दिखाई दिया। यहां सड़क पूरी तरह पानी में डूब गई। कई स्थानों पर कई फीट तक पानी जमा होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। नानाखेड़ी मंडी गेट पर भी भारी जलभराव देखने को मिला। खास बात यह है कि पिछले साल बारिश के दौरान बने हालात के बाद यहां नाली निर्माण और अतिक्रमण हटाने की कवायद शुरू की गई थी। दुकानदारों से करीब 20 फीट चौड़ी नाली बनाने की बात कही गई थी और कई जगह नाली निर्माण भी शुरू हुआ, लेकिन कई स्थानों पर काम अधूरा रह गया। मंगलवार की बारिश ने अधूरे काम की हकीकत सामने ला दी। मंडी गेट और आसपास के इलाकों में पानी भरने से कई दुकानदारों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर रखना पड़ा।
तीन घरों में घुसा पानी, सामान हुआ खराब
नानाखेड़ी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर रही कि तीन घरों के कमरों तक बारिश का पानी पहुंच गया। परिवारों को बाल्टी और मग्गे की मदद से घर के अंदर जमा पानी बाहर निकालना पड़ा। रहवासियों के मुताबिक पानी भरने से घर में रखा फ्रिज, टीवी, खाद्य सामग्री और गेहूं तक भीग गया। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में जलभराव की समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका।
गोविंद गार्डन में पानी में फंसी महिला, SDRF ने किया रेस्क्यू
गुनिया नदी के किनारे बसे पटेल नगर और गोविंद गार्डन में भी बारिश का पानी सड़कों और घरों तक पहुंच गया। कई जगह तीन से चार फीट तक पानी भरने की स्थिति बनी। इसी दौरान गोविंद गार्डन क्षेत्र में एक महिला पानी में फंस गई। सूचना मिलते ही SDRF की टीम मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। तेज बहाव और अधिक पानी के कारण रेस्क्यू टीम को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।

नई सड़क पर घुटनों तक पानी, दुकानदारों ने बचाया सामान
शहर की नई सड़क पर भी बारिश के दौरान घुटनों तक पानी बहता नजर आया। सड़क पर पानी का बहाव तेज होने के कारण पैदल निकलना मुश्किल हो गया। दुकानों के सामने पानी जमा होने के बाद व्यापारी अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने में जुट गए। कई दुकानदारों ने सामान ऊंचाई पर रखा और दुकानों में पानी घुसने से रोकने के लिए तत्काल इंतजाम किए।
गुनिया नदी भी उफान पर, बढ़ी चिंता
भारी बारिश के बाद गुनिया नदी का जलस्तर भी बढ़ गया और नदी उफान पर आ गई। नदी के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई। पिछले साल 29 जुलाई को हुई बारिश के दौरान नानाखेड़ी क्षेत्र में जलभराव के बाद प्रशासन ने नदी और नालों की सफाई पर जोर दिया था। इसके बाद गुनिया नदी और नालों की सफाई के लिए करीब एक महीने तक JCB मशीनें भी लगाई गईं। कुछ स्थानों पर अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे, लेकिन कई जगह अतिक्रमण हटाने और जल निकासी सुधारने का काम अधूरा रह गया। अब मंगलवार की बारिश ने एक बार फिर व्यवस्था की जमीनी स्थिति सामने ला दी।
पिछली बारिश से सबक के बाद भी क्यों बिगड़े हालात?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पिछले साल बारिश के दौरान शहर में जलभराव के गंभीर हालात बने थे, तो इस बार उससे निपटने के लिए कितनी तैयारी की गई थी? नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाने और जल निकासी व्यवस्था सुधारने की कवायद के बावजूद अगर कुछ घंटों की तेज बारिश में शहर के कई इलाके जलमग्न हो जाएं, घरों में पानी घुस जाए और SDRF को रेस्क्यू के लिए उतरना पड़े, तो तैयारियों की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
बारिश ने किसानों को राहत, शहर की व्यवस्था को चुनौती
मंगलवार की बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है। लंबे इंतजार के बाद हुई अच्छी बारिश से फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है। लेकिन दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में जलभराव ने नगर पालिका और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि जलभराव वाले इलाकों को चिन्हित कर नालियों की तत्काल सफाई कराई जाए, अधूरे नाली निर्माण पूरे किए जाएं और जहां प्राकृतिक जल निकासी संभव नहीं है, वहां मशीनों के जरिए पानी निकाला जाए। बारिश का मौसम अभी बाकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर कुछ घंटों की बारिश में गुना के कई इलाके पानी में डूब सकते हैं, तो आने वाले दिनों में इससे भी ज्यादा बारिश हुई तो हालात कितने गंभीर होंगे? अब प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ बारिश से निपटने की नहीं, बल्कि शहर की जल निकासी व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त करने की भी है।














