रीवा/जवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के जवा जनपद क्षेत्र से बाढ़ के बीच इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। ग्राम पंचायत रौली में बाढ़ के पानी के कारण रास्ता बंद होने के बाद ग्रामीणों को एक शव को घर तक पहुंचाने के लिए ड्रम का सहारा लेना पड़ा। ग्रामीणों ने ड्रमों को आपस में बांधकर उसके ऊपर शव रखा और बाढ़ के पानी को पार कराते हुए उसे घर तक पहुंचाया। घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद ग्रामीण इलाकों में आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बाढ़ के कारण बंद हुआ गांव का रास्ता
बताया जा रहा है कि लगातार बारिश के बाद रौली गांव और आसपास के इलाके में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। पानी बढ़ने के कारण गांव का आवागमन प्रभावित हो गया और रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया। इसी दौरान गांव में एक व्यक्ति की मौत हो गई। शव को घर तक पहुंचाने के लिए सामान्य रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजन और ग्रामीणों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई।

ड्रम को बनाया सहारा, पानी के बीच ले गए शव
रास्ता बंद होने के बाद ग्रामीणों ने जुगाड़ के तौर पर ड्रमों का इस्तेमाल किया। ड्रमों को आपस में बांधकर उनके ऊपर शव को रखा गया और ग्रामीण बाढ़ के पानी के बीच से उसे लेकर आगे बढ़े। शव को इस तरह ले जाने की तस्वीर सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के बीच भी मृत व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने के लिए जरूरी व्यवस्था होनी चाहिए।
सरपंच को सूचना देने का दावा
ग्रामीणों की ओर से दावा किया गया है कि बाढ़ की स्थिति और शव को ले जाने में आ रही परेशानी की जानकारी सरपंच को भी दी गई थी, लेकिन समय पर मदद नहीं मिल सकी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में संबंधित प्रशासन या पंचायत का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाढ़ जैसी आपदा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की आपातकालीन व्यवस्था कितनी प्रभावी है। यदि किसी गांव का रास्ता बाढ़ के कारण बंद हो जाए और इसी दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो शव को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से घर या अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी होगी? रौली गांव की यह तस्वीर केवल एक परिवार की परेशानी नहीं दिखाती, बल्कि बाढ़ प्रभावित ग्रामीण इलाकों में सड़क, आवागमन और आपदा प्रबंधन जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है। बाढ़ रास्ता रोक सकती है, लेकिन किसी मृत व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने का रास्ता नहीं रुकना चाहिए। अब देखना होगा कि इस घटना के बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों के लिए क्या व्यवस्था की जाती है और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।














