डीके शिवकुमार सरकार के मंत्रिमंडल में 19 नए चेहरे शामिल, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे बने मंत्री; महिला प्रतिनिधित्व नहीं होने पर उठे सवाल।

बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के गठन के करीब दो महीने बाद सोमवार को मंत्रिमंडल का पहला विस्तार किया गया। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 19 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। नए मंत्रियों में छह विधायक ऐसे हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। वहीं, इस विस्तार के बाद तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवारों का प्रतिनिधित्व भी मंत्रिमंडल में शामिल हो गया। नए मंत्रिमंडल में डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया (पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे), मधु बंगारप्पा (पूर्व मुख्यमंत्री एस. बंगारप्पा के बेटे) और अजय सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री एन. धर्म सिंह के बेटे) को मंत्री बनाया गया है।कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर रही कि किसी भी महिला विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी वाली सूची में गायत्री शांतेगौड़ा का नाम शामिल था, लेकिन उन्होंने शपथ नहीं ली। इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री नहीं बची।राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगदागी, रुद्रप्पा लमानी, के.एस. बसवंतप्पा, बी. नागेंद्र, टी. रघुमूर्ति, बी.जेड. जमीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुत्तरंगाशेट्टी, एस.एस. मल्लिकार्जुन, अजय सिंह, एन. चालुवराया स्वामी, के.एम. शिवलिंगे गौड़ा, एच.सी. बालकृष्ण, बसवराज रायरेड्डी, विजयानंद कशप्पनवर और लक्ष्मण सावदी को मंत्री पद की शपथ दिलाई। कैबिनेट विस्तार में जगह नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौडा वी. पाटिल ने अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम से राज्य की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में लिंगायत, वोक्कालिगा और कुरबा समुदायों के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी गई है। कर्नाटक की राजनीति में इन समुदायों का महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है और सरकार ने सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और नई कैबिनेट की कार्यशैली पर टिकी है।














