E20 फ्यूल की कीमत कम करने, शुद्ध पेट्रोल का विकल्प देने और पेट्रोल के दाम घटाने की मांग; केंद्र सरकार पर E20 ईंधन थोपने का लगाया आरोप

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) ने शुक्रवार को E20 फ्यूल के मुद्दे पर ‘नेशनल टाउन हॉल’ का आयोजन किया। कार्यक्रम के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर E20 पेट्रोल को लोगों पर जबरन थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को E20 और शुद्ध पेट्रोल दोनों में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प देना चाहिए। केजरीवाल ने कहा कि टाउन हॉल में लोगों की ओर से तीन प्रमुख मांगें सामने आईं। पहली, पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए। दूसरी, E20 ईंधन की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखी जाए। तीसरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए पेट्रोल की खुदरा कीमत 84 रुपये प्रति लीटर से कम की जाए।प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा कि यदि E20 ईंधन वास्तव में लाभदायक है, तो सरकार लोगों को विकल्प देने से क्यों बच रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि नागरिकों पर इसे अनिवार्य रूप से क्यों थोपा जा रहा है।केजरीवाल ने दावा किया कि E20 ईंधन से वाहन मालिकों को कई तरह की परेशानियां हो रही हैं। उनके अनुसार, यह पेट्रोल से महंगा पड़ता है, वाहनों का माइलेज कम करता है, मेंटेनेंस खर्च बढ़ाता है और इंजन के कुछ पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एथेनॉल उत्पादन से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा और एथेनॉल प्लांट के आसपास भूजल प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है।उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि E20 से इतने सवाल जुड़े हैं तो इसे पूरे देश में तेजी से लागू करने की क्या वजह है।AAP का दावा है कि देश में 2023 से पहले बनी करीब 30 करोड़ पेट्रोल गाड़ियां चल रही हैं। पार्टी का कहना है कि इन वाहनों के मालिकों को E20 ईंधन को लेकर चिंता है, क्योंकि इससे माइलेज और मेंटेनेंस पर असर पड़ सकता है।AAP ने बताया कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के नाम एक ऑनलाइन याचिका भी चलाई गई है, जिस पर दो लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। पार्टी ने कहा कि यह याचिका प्रधानमंत्री को सौंपकर E20 नीति पर पुनर्विचार की मांग की जाएगी।हालांकि, केंद्र सरकार पहले कई मौकों पर कह चुकी है कि E20 ईंधन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और इसे लेकर विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए गए हैं। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और प्रदूषण में कमी आएगी।














