संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में रविवार को उस समय राजनीतिक हलचल बढ़ गई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ देर बाद सभी विपक्षी दल दोबारा बैठक में शामिल हो गए। 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित इस बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच शुरुआती दौर में ही तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष का आरोप था कि सर्वदलीय बैठक के लिए जारी सूची में उन सांसदों को अलग राजनीतिक दल (NCPI) के प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया गया, जिनके विलय या अलग पहचान को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है।इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया।
महुआ मोइत्रा ने क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष का विरोध इस बात को लेकर था कि टेबल ऑफिस द्वारा जारी सूची में TMC की सदस्य संख्या 28 दिखाई गई, जबकि जिन 20 सांसदों को अलग समूह के रूप में दर्शाया गया है, उनके विलय को अब तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है।उनका कहना था कि ऐसे में उन्हें अलग दल के रूप में मान्यता देना उचित नहीं है।

कुछ देर बाद फिर बैठक में लौटा विपक्ष
विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्षी दल कुछ समय के लिए बैठक से बाहर चले गए। बाद में सभी दल वापस बैठक में शामिल हुए और मानसून सत्र के एजेंडे समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा में हिस्सा लिया।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश कर सकती है, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दलों के बीच सहमति और सहयोग का माहौल बनाना था, लेकिन शुरुआत ही राजनीतिक टकराव के साथ हुई।












