देश में विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक ओर लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से पुलिस कार्रवाई के बाद अस्पताल ले जाए जाने का मामला चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और उनके साथियों को भी प्रशासन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल में भर्ती कराया है। इन दोनों घटनाओं के बाद विपक्ष, सामाजिक संगठनों और आंदोलनकारियों ने सरकारों के रवैये पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। छतरपुर जिले के बिजावर क्षेत्र के ग्राम कुपी में केन-बेतवा लिंक परियोजना और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को लेकर कई दिनों से आंदोलन चल रहा था। आंदोलनकारी बेहतर पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे थे। प्रशासन के अनुसार, अनशन कर रहे अमित भटनागर की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिजावर में भर्ती कराया। वहीं अन्य प्रदर्शनकारियों को भी समझाइश देकर आंदोलन स्थल खाली कराया गया और पन्ना जिले के लोगों को बसों के माध्यम से उनके घर भेजा गया। प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।












