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रतलाम में चार माह के जुड़वा बच्चों की हत्या के मामले में मां को दोहरा उम्रकैद, पिता को भी 3-3 साल की सजा

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आपके दिए गए विवरण के आधार पर वेबसाइट के लिए खबर को इस तरह लिखा जा सकता है:रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में चार माह के जुड़वा बच्चों हसन और फातिमा की हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने मां को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया की अदालत ने आरोपी मां पम्मी उर्फ मुस्कान को दोनों बच्चों की हत्या का दोषी मानते हुए दोहरे आजीवन कारावास के साथ 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।वहीं, बच्चों के पिता आमिर कुरैशी को घटना के बाद शवों को बिना पुलिस को सूचना दिए दफनाने और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाया गया। अदालत ने उसे तीन-तीन वर्ष के कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

पानी की टंकी में डूबे मिले थे दोनों बच्चेचार महीने के जुड़वा बच्चों को पानी की टंकी में डुबोकर मारने वाली मां को उम्रकैद, सबूत छिपाने वाले पिता को भी सजा

अभियोजन के मुताबिक, 20 नवंबर 2024 को माणक चौक थाना पुलिस को घटना की सूचना मिली थी। रतलाम की वेदव्यास कॉलोनी में रहने वाले परिवार के घर में चार माह के जुड़वा बच्चे हसन और फातिमा पानी के ड्रम में मृत अवस्था में मिले थे।घटना के समय बच्चों की मां मुस्कान घर में अकेली थी। जानकारी मिलने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

पुलिस को सूचना दिए बिना दफना दिए शव

बच्चों की मौत के बाद पिता आमिर कुरैशी और उसका साथी बिलाल दोनों शवों को अपने पिता के घर ले गए। इसके बाद दोनों बच्चों को बिना पुलिस को सूचना दिए शेरानीपुरा कब्रिस्तान में दफना दिया गया।

मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचने के बाद माणक चौक थाना पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान तहसीलदार की मौजूदगी में दोनों बच्चों के शवों को कब्रिस्तान से बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम कराया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चों की मौत पानी में डूबने से होने की पुष्टि हुई।

पति के रिश्तेदारी में जाने से नाराज थी मां

पुलिस जांच और अभियोजन के अनुसार, घटना के समय मुस्कान अपने दोनों बच्चों के साथ घर में अकेली थी। आरोप था कि पति के रिश्तेदारी में चले जाने से नाराज होकर उसने पहले एक बच्चे और फिर दूसरे बच्चे को पानी की टंकी में डुबो दिया।

पुलिस ने जांच के बाद मुस्कान के खिलाफ हत्या और आमिर कुरैशी के खिलाफ साक्ष्य छिपाने का मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया था।

24 गवाहों में 16 हुए पक्षद्रोही

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल 24 गवाह पेश किए गए। इनमें से 16 गवाह पक्षद्रोही हो गए। इसके बावजूद अभियोजन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के सामने रखा।

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद मां मुस्कान को दोनों बच्चों की हत्या का दोषी माना और उसे दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, बच्चों के शवों को पुलिस को सूचना दिए बिना दफनाने और साक्ष्य छिपाने के मामले में पिता आमिर कुरैशी को तीन वर्ष के कारावास की सजा दी गई।

अदालत के इस फैसले के बाद मामले में दोषियों को सजा मिल गई है। यह फैसला इस बात का भी उदाहरण है कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के पक्षद्रोही होने के बावजूद मजबूत परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत दोष सिद्ध कर सकती है।

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