वेबसाइट के लिए इस खबर को थोड़ा ज्यादा प्रभावी और न्यूज़ पोर्टल शैली में इस तरह लिखा जा सकता है: भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद पार्टी संगठन में मंथन का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री आवास पर मंगलवार को दतिया उपचुनाव के परिणाम को लेकर भाजपा की समीक्षा बैठक चल रही है। बैठक में दतिया उपचुनाव से जुड़े संगठन के पदाधिकारी और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद हैं।इसी बीच भाजपा प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में वे चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर से कथित तौर पर हुए विरोध और भीतरघात से जुड़े आरोपों को प्रमुखता से उठा सकते हैं।
ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ पहुंचे आशुतोष तिवारी
सूत्रों की मानें तो आशुतोष तिवारी के पास कुछ ऐसी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी हैं, जिन्हें वे संगठन के सामने रख सकते हैं। इन रिकॉर्डिंग के जरिए चुनाव के दौरान पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की कथित भूमिका पर सवाल उठाए जाने की संभावना है।
हालांकि, ऑडियो रिकॉर्डिंग की वास्तविकता और उसमें मौजूद दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बैठक में इन शिकायतों और आरोपों पर पार्टी नेतृत्व क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
दतिया में 6 हजार से ज्यादा वोटों से हारी BJP
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया है। इस हार के बाद भाजपा संगठन में चुनावी रणनीति, स्थानीय स्तर पर पार्टी की स्थिति और नेताओं की भूमिका को लेकर समीक्षा की जा रही है।
भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दतिया सीट लंबे समय तक पार्टी के दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का गढ़ रही है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को हराया था और अब उपचुनाव में भी कांग्रेस ने सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है।
बैठक के बाद हो सकते हैं बड़े फैसले
दतिया उपचुनाव में हार के बाद हो रही इस समीक्षा बैठक को भाजपा संगठन के लिए अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में चुनाव परिणाम के कारणों, संगठन की भूमिका और कथित भीतरघात के आरोपों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
यदि पार्टी नेतृत्व को शिकायतों में तथ्य मिलते हैं तो आने वाले दिनों में संगठन स्तर पर कुछ नेताओं और पदाधिकारियों पर कार्रवाई या जिम्मेदारियों में बदलाव भी संभव है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय भाजपा संगठन की समीक्षा के बाद ही सामने आएगा।














