नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया। अदालत ने प्रदर्शन से संबंधित दर्ज FIR को रद्द करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इस मामले में नई FIR दर्ज करने पर भी रोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने साफ किया कि यह फैसला मामले की परिस्थितियों और सामने आए विशेष तथ्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसे भविष्य के दूसरे मामलों में मिसाल के तौर पर बाध्यकारी नहीं माना जाएगा।
प्रदर्शन में आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों का भी जिक्र – सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रदर्शन में शामिल लोगों को लेकर अपनी दलील रखी गई। सरकार ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोग भी वहां मौजूद थे। हालांकि, अदालत के आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने मारपीट की या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी आपराधिक गतिविधि की है, तो उससे संबंधित कार्रवाई जारी रह सकती है। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दिया था आवेदन FIR से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दाखिल किया गया था। पुलिस ने अदालत को बताया था कि वह प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई के पहले के आदेश के बाद सामने आया था। पुलिस की ओर से अदालत के समक्ष इन मामलों को आगे चलाने के बजाय समाप्त करने की इच्छा जताई गई थी। अनुच्छेद 142 के तहत मिला आदेश सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि FIR रद्द करने का आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली उसकी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए दिया जा रहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों पर आधारित है। इसलिए इसे दूसरे मामलों में स्वतः लागू होने वाली कानूनी मिसाल नहीं माना जाएगा। 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने की घोषणा कर दी थी। संगठन की ओर से कहा गया कि सरकार के साथ बातचीत में गतिरोध के बाद मार्च का फैसला लिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संगठन ने इसे वापस लेने का निर्णय किया है। संगठन के प्रतिनिधियों ने अदालत के फैसले को छात्रों के पक्ष में बड़ी जीत बताया। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर लंबे समय से आपत्ति थी और अब उन्हें राहत मिली है।20 जुलाई को हुआ था प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों में टकराव जंतर-मंतर से जुड़े आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव हुआ था। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।इसके बाद आंदोलन का असर दूसरे शहरों में भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मुद्दे शामिल थे।आंदोलन की शुरुआत 20 जून को जंतर-मंतर से हुई थी। बाद में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बनी सहमति के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई थी।














