ओरछा। मध्य प्रदेश की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर समय-समय पर होने वाली चर्चाओं के बीच पूर्व मंत्री इमरती देवी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में इमरती देवी प्रदेश सरकार की राज्यमंत्री कृष्णा गौर से मुलाकात के दौरान उन्हें गले लगाती नजर आ रही हैं। इसी दौरान उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि रामराजा सरकार कृष्णा गौर को मुख्यमंत्री बना दें। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के चलते पार्टी के कई बड़े नेता और पदाधिकारी एक मंच पर मौजूद थे। ऐसे में इमरती देवी की यह टिप्पणी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन गई है।
कृष्णा गौर से मुलाकात के दौरान कही बात
वायरल वीडियो में इमरती देवी और कृष्णा गौर आपस में बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। इसी दौरान इमरती देवी ने कृष्णा गौर को गले लगाते हुए कहा कि काफी दिनों बाद मुलाकात हुई है और वह चाहती हैं कि रामराजा सरकार उन्हें मुख्यमंत्री बना दें। इमरती देवी की इस बात पर कृष्णा गौर मुस्कुराती नजर आती हैं। बातचीत के बाद दोनों नेता वहां से आगे बढ़ जाती हैं।
बयान को लेकर शुरू हुई सियासी चर्चा
इमरती देवी की पहचान भाजपा में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की समर्थक नेता के तौर पर रही है। अपने बेबाक बयानों के कारण वह पहले भी सुर्खियों में रह चुकी हैं। ऐसे में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान सामने आए इस वीडियो को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि इमरती देवी ने यह बात सहज और मजाकिया बातचीत के दौरान कही थी। इसे किसी औपचारिक राजनीतिक बयान या मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर चल रही किसी कवायद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने साधा निशाना
वहीं, इमरती देवी के बयान को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। ग्रामीण कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रभुदयाल जौहरे ने इसे भाजपा और सिंधिया समर्थक खेमे के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर इस तरह की टिप्पणियां सामने आना प्रदेश की अंदरूनी राजनीति की ओर इशारा करता है।
मजाक, दुआ या सियासी संदेश?
फिलहाल वीडियो में हुई बातचीत को लेकर अलग-अलग राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। इमरती देवी ने यह टिप्पणी किस संदर्भ में की, इसे लेकर उनकी ओर से कोई विस्तृत राजनीतिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह बयान महज दो नेताओं के बीच हुई हल्की-फुल्की बातचीत थी या इसके पीछे कोई सियासी संदेश भी है, यह फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है। इतना जरूर है कि कुछ सेकंड के इस वीडियो ने मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर नई चर्चाओं को हवा दे दी है।














