नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता है और पिछले दो महीनों में चीनी के दाम 40 फीसदी से ज्यादा बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। कई राज्यों में खुदरा कीमतें ₹65 प्रति किलो के पार पहुंच गई हैं।
सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए करीब एक दशक में पहली बार 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। इसके बावजूद बाजार में चीनी के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं।
ओडिशा में ₹67.40 किलो पहुंची कीमत
23 अगस्त को ओडिशा में चीनी की कीमत ₹67.40 प्रति किलो दर्ज की गई। एक सप्ताह पहले यही कीमत ₹55, एक महीने पहले ₹50.78 और 23 अगस्त 2025 को ₹46.89 प्रति किलो थी।
यानी एक साल के भीतर कीमत में करीब 44 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश और ओडिशा समेत कई राज्यों में चीनी ₹65 प्रति किलो से ऊपर बिक रही है।
सरकार ने उठाया बड़ा कदम
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार की कोशिश है कि घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़े और कीमतों पर दबाव कम हो।
हालांकि, आयात के फैसले के बावजूद खुदरा बाजार में कीमतों में तत्काल राहत दिखाई नहीं दे रही है।
चीनी कंपनियों के शेयरों में भी तेजी
चीनी की कीमतों में तेजी का असर शुगर कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया। सोमवार के इंट्राडे कारोबार में कई चीनी कंपनियों के शेयरों में 12 फीसदी तक की तेजी आई। कई कंपनियों के शेयर 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर तक पहुंच गए।
चुनाव के बीच बढ़ती कीमतें बन सकती हैं मुद्दा
पंजाब और उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए महंगी चीनी सरकार के लिए राजनीतिक चिंता का विषय भी बन सकती है। रोजमर्रा की जरूरत की चीज होने के कारण चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि सरकार के ड्यूटी-फ्री आयात जैसे कदमों के बाद भी चीनी की कीमतें कब तक नीचे आएंगी और आम लोगों को राहत कब मिलेगी?














