धार। मध्य प्रदेश के धार में ऐतिहासिक भोजशाला की व्यवस्थाओं और कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। सकल हिंदू समाज के आह्वान पर मंगलवार को ‘धार जिला बंद’ रखा गया। बंद का असर धार शहर के साथ-साथ सरदारपुर, कुक्षी, बदनावर, मनावर और पीथमपुर सहित जिले के कई क्षेत्रों में देखने को मिला। अधिकांश बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बंद रहने से शहर में सन्नाटा नजर आया।

व्यापारियों से बंद की अपील
सुबह से ही हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और बाइक रैली निकालकर व्यापारियों से प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से दुकानदारों से बंद का समर्थन करने का आग्रह किया। प्रशासन की ओर से आम लोगों को आवश्यक सेवाओं में परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा गया। स्कूल, कॉलेज, पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर, स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया।
भोजशाला से जुड़ी व्यवस्था का विरोध
हिंदू समाज की ओर से भोजशाला के समीप स्थित खसरा नंबर 612 की भूमि पर शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज की व्यवस्था को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस व्यवस्था को समाप्त किया जाए और भोजशाला मामले में कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। सकल हिंदू समाज का कहना है कि भोजशाला से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिससे न्यायालय के निर्देशों की भावना प्रभावित हो।

800 पुलिसकर्मियों की तैनाती
बंद को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीएसपी शशांक गुर्जर के नेतृत्व में करीब 800 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। पुलिस लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।
जबरन दुकान बंद कराने पर कार्रवाई की चेतावनी
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बंद के दौरान किसी भी व्यक्ति को जबरन दुकान बंद कराने, लोगों के साथ अभद्रता करने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल धार में बंद के दौरान स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। प्रशासन और पुलिस की नजर संवेदनशील क्षेत्रों पर बनी हुई है। भोजशाला को लेकर विवाद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोर्ट के निर्देशों और दोनों पक्षों की आपत्तियों के बीच प्रशासन आगे की व्यवस्था किस तरह तय करता है।














