नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने कर्नाटक के वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद वेंकटेश जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करते हुए यह नई जिम्मेदारी प्रल्हाद जोशी को सौंपी है।अब प्रल्हाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का भी कार्यभार संभालेंगे।

कौन हैं प्रल्हाद जोशी?
प्रल्हाद वेंकटेश जोशी भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं। वे कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार कई बार सांसद चुने जा चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता और इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 में भी जनता ने उन्हें लगातार संसद भेजा।
कर्नाटक की राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर
प्रल्हाद जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक में संगठन स्तर पर काम करते हुए की। 1990 के दशक की शुरुआत में हुबली के ईदगाह मैदान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर हुए आंदोलन के दौरान वे पहली बार चर्चा में आए। इसके बाद उन्होंने भाजपा संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई। वे 2012 से 2016 तक भाजपा की कर्नाटक इकाई के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने राज्य में पार्टी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब शिक्षा मंत्रालय की कमान
दो दशक से अधिक के संसदीय अनुभव रखने वाले प्रल्हाद जोशी अब ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब NEET परीक्षा विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में बहस जारी है। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में शिक्षा मंत्रालय परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और नई नीतियों के क्रियान्वयन पर तेजी से काम कर सकता है।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह बदलाव केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है।














