उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में मां शिप्रा की दैनिक आरती को लेकर महाकाल मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। रामघाट पर पिछले करीब 11 वर्षों से चली आ रही शिप्रा आरती की परंपरा को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। प्रशासन की ओर से आरती की व्यवस्था महाकाल मंदिर समिति को सौंपे जाने के बाद पंडा समिति ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।प्रशासन का कहना है कि शिप्रा आरती को हरिद्वार की गंगा आरती की तर्ज पर भव्य और व्यवस्थित स्वरूप देने के उद्देश्य से इसकी व्यवस्था महाकाल मंदिर समिति को सौंपी गई है। वहीं, तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि इस नई व्यवस्था के जरिए उन्हें वर्षों से चली आ रही आरती की परंपरा से हटाने की कोशिश की जा रही है।

रामघाट पर आमने-सामने आए दोनों पक्ष
बताया जा रहा है कि रामघाट पर पिछले 11 वर्षों से पंडा समिति की ओर से शाम करीब 6:30 बजे दैनिक शिप्रा आरती कराई जा रही है। विवाद तब बढ़ा जब महाकाल मंदिर समिति ने आरती के लिए पुलिस सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन को पत्र भेजा। इसके बाद मंदिर समिति के बटुक रामघाट पहुंचे और आरती की तैयारी शुरू की, लेकिन पंडा समिति के लोगों ने उन्हें आरती करने से रोक दिया। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक गतिरोध बना रहा। बाद में मंदिर समिति के बटुकों ने घाट पर दूसरी जगह आरती की।
7 अगस्त को फिर बढ़ा विवाद
7 अगस्त को एक बार फिर महाकाल मंदिर समिति के बटुक रामघाट पर आरती करने पहुंचे। पंडा समिति ने उन्हें रोक दिया। स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस बल के साथ दो एसडीएम भी पहुंचे। अधिकारियों ने पंडा समिति के लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। गतिरोध खत्म नहीं होने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए पंडा समिति के पुजारियों को घाट से हटाया। इसके बाद महाकाल मंदिर समिति के बटुकों ने रामघाट पर दूसरी जगह शिप्रा आरती की।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में जल सत्याग्रह
पुलिस की कार्रवाई से नाराज पंडा समिति ने अब आंदोलन का ऐलान कर दिया है। समिति के अनुसार, शनिवार शाम 4 बजे शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह किया जाएगा। पंडा पुरोहितों का कहना है कि वे 11 वर्षों से धार्मिक परंपरा के तहत आरती कराते आ रहे हैं और इसे अचानक उनसे छीना जाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं प्रशासन का रुख साफ है कि अब शिप्रा आरती की व्यवस्था महाकाल मंदिर समिति ही संभालेगी। प्रशासन इसे शिप्रा आरती को नया और भव्य स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है।फिलहाल आरती की व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विवाद धार्मिक परंपरा, प्रशासनिक अधिकार और स्थानीय पुरोहितों की भूमिका के सवाल तक पहुंच गया है। रामघाट पर तनाव को देखते हुए पुलिस-प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है और अब सबकी नजर पंडा समिति के प्रस्तावित जल सत्याग्रह पर है।














