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इंदौर में सराफा व्यापारी करवा रहा था सोना तस्करी, कस्टम अधिकारी और एयरपोर्ट स्टाफ सिंडिकेट का हिस्सा

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इंदौर। इंदौर एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने करीब 1.28 करोड़ रुपये मूल्य के 1 किलो 20 ग्राम विदेशी सोने के साथ पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड इंदौर सराफा बाजार का एक व्यापारी था, जबकि एयरपोर्ट पर तैनात ग्राउंड स्टाफ और कस्टम विभाग का एक कर्मचारी भी तस्करी में उसकी मदद कर रहे थे।अबूधाबी से आने वाली फ्लाइट से हो रही थी तस्करीडीआरआई को गोपनीय सूचना मिली थी कि अबूधाबी से इंदौर आने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट (IX-248) के जरिए लगातार सोने की तस्करी की जा रही है। इसके बाद एजेंसी ने कई दिनों तक यात्रियों की प्रोफाइलिंग और निगरानी की। कार्रवाई के दौरान एक यात्री को पूछताछ के लिए रोका गया और उसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया।पांच आरोपी गिरफ्तार डीआरआई ने इस मामले में सराफा व्यापारी संजय मुंजे, सोना लेकर आए गोविंद पोरवाल, एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ वासुदेव बरनाले, हैंडलिंग एजेंसी के पूर्व कर्मचारी अमन गेहलोत और कस्टम विभाग के टैक्स असिस्टेंट अजय कुमार सेन को गिरफ्तार किया है।

ऐसे काम करता था पूरा सिंडिकेटइंदौर में सराफा व्यापारी करवा रहा था सोना तस्करी, कस्टम अधिकारी और एयरपोर्ट स्टाफ सिंडिकेट का हिस्सा

जांच में सामने आया कि सराफा व्यापारी संजय मुंजे विदेश से सोना मंगाने के लिए अपने पूर्व कर्मचारी गोविंद पोरवाल का इस्तेमाल करता था। गोविंद अबूधाबी से सोने को कड़े (ब्रेसलेट) के रूप में तैयार कराकर लाता था और उसकी पहचान छिपाने के लिए उस पर चांदी जैसी परत चढ़ा दी जाती थी।

इंदौर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद कस्टम जांच से पहले एयरोब्रिज पर ही गोविंद, एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ वासुदेव बरनाले को सोना सौंप देता था। ग्राउंड स्टाफ होने के कारण उसकी सामान्य यात्रियों की तरह जांच नहीं होती थी। इसके बाद सोना एयरपोर्ट से बाहर निकालकर अमन गेहलोत के जरिए सराफा व्यापारी तक पहुंचाया जाता था।

कस्टम कर्मचारी देता था अंदर की जानकारी

जांच एजेंसी के मुताबिक, एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम विभाग का कर्मचारी अजय कुमार सेन तस्करों को यह जानकारी देता था कि डीआरआई और कस्टम की टीम कहां तैनात है और किस रास्ते से सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है। आरोप है कि इस मदद के बदले सिंडिकेट के सदस्य प्रत्येक खेप पर उसे और अन्य सहयोगियों को 10 हजार रुपये देते थे।

कई दिनों की निगरानी के बाद हुई कार्रवाई

डीआरआई ने बताया कि जुलाई में अबूधाबी-इंदौर उड़ान शुरू होने के बाद से ही इस रूट पर नजर रखी जा रही थी। लगातार निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर सोमवार और मंगलवार को संयुक्त कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया।

जांच जारी

डीआरआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितनी बार सोने की तस्करी की गई, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा क्या इसके तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह से जुड़े हैं। एजेंसी मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

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