मिडिल ईस्ट में जंग और तेज होती जा रही है। अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने से भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता गहरा गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 7 घंटे तक चले सैन्य अभियान में दक्षिणी ईरान और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों, नौसैनिक संसाधनों और तटीय रक्षा प्रणाली पर हमले किए गए। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि तेहरान बातचीत और समझौते के लिए आगे नहीं आया तो अगले चरण में बिजलीघर और पुल जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा सकता है। वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इस संघर्ष का असर अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है। हाल ही में दो व्यापारिक जहाजों पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत और 10 लोगों के घायल होने के बाद भारत सरकार ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और सुरक्षित रास्ता मिलने का इंतजार कर रहे हैं। पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह तनाव वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर भी बड़ा असर डाल सकता है।














