इंदौर के बहुचर्चित IAS संतोष वर्मा और तत्कालीन जिला न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत मामले में एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है। हाई कोर्ट द्वारा विजेंद्र सिंह रावत को विभागीय कार्रवाई से राहत देने से इनकार करने के बाद SIT की चार्जशीट चर्चा में है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि प्रमोशन दिलाने के लिए नियमों को दरकिनार कर पूरी प्रक्रिया को असामान्य तेजी से पूरा कराया गया SIT की चार्जशीट के मुताबिक, तत्कालीन जिला न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत और IAS अधिकारी संतोष वर्मा के बीच करीब 140 बार फोन पर बातचीत हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि 6 अक्टूबर 2020 को दोनों की इंदौर के ग्रैंड माचल रिजॉर्ट में मुलाकात हुई। इसी दिन न्यायाधीश ने कोर्ट से अवकाश का आवेदन भी दिया था। चार्जशीट में दर्ज टाइमलाइन के अनुसार, 7 अक्टूबर 2020 को शाम करीब 5:15 बजे कोर्ट की नकल शाखा से आदेश की दो प्रमाणित प्रतियां जारी की गईं और उसी रात करीब 9 बजे फैसला संतोष वर्मा को उनके निवास के पास सौंप दिया गया। अगले ही दिन 8 अक्टूबर को संतोष वर्मा आदेश की प्रतियां लेकर भोपाल स्थित सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) पहुंचे और पदोन्नति से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया। यह पूरा मामला वर्ष 2016 में दर्ज एक महिला की शिकायत से जुड़ा है। SIT का आरोप है कि वर्ष 2020 में होने वाली पदोन्नति से पहले लंबित मामले का जल्द निपटारा कराने के लिए न्यायिक प्रक्रिया में कथित रूप से अनियमितताएं की गईं।बाद में पीड़ित महिला ने विजिलेंस और जिला न्यायाधीश के समक्ष शिकायत की।
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मामले में फर्जी जजमेंट तैयार करने के आरोप में एमजी रोड थाने में एफआईआर दर्ज हुई। SIT ने जांच पूरी कर IAS संतोष वर्मा और तत्कालीन जिला न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में चार्जशीट पेश की है।
नोट: ये आरोप विशेष जांच दल (SIT) की चार्जशीट का हिस्सा हैं। मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सुनाया जाना बाकी है।














