जबलपुर। छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेश गुन्नाड़े को निलंबन मामले में हाई कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किए गए निलंबन आदेश पर रोक लगाने से कोर्ट ने इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने डॉ. गुन्नाड़े को पहले विभागीय स्तर पर वैधानिक अपील दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
प्रसूति सहायता राशि की शिकायत पर हुई थी कार्रवाई
मामला छिंदवाड़ा की सीमा तुमराम को प्रसूति सहायता राशि नहीं मिलने की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंची थी। इसके बाद 8 अगस्त 2026 को छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सार्वजनिक रूप से CMHO के निलंबन की घोषणा की थी।
निलंबन के बाद डॉ. गुन्नाड़े को छिंदवाड़ा से करीब 307 किलोमीटर दूर कटनी स्थित कार्यालय में संलग्न कर दिया गया था।
CMHO ने निलंबन को दी थी चुनौती
डॉ. गुन्नाड़े ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर निलंबन आदेश को चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि जिस दिन कार्रवाई की गई, वह महीने का दूसरा शनिवार और सरकारी अवकाश था। याचिका में कार्रवाई में जल्दबाजी और कथित राजनीतिक दबाव का भी आरोप लगाया गया।
वहीं, शासन की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम के नियम 23 के तहत निलंबन के खिलाफ विभागीय अपील का प्रावधान मौजूद है। इसलिए पहले विभागीय स्तर पर उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने निलंबन आदेश पर सीधे रोक लगाने के बजाय याचिका का निराकरण करते हुए डॉ. गुन्नाड़े को 10 दिन के भीतर विभागीय अपील दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने संबंधित विभाग को भी निर्देश दिया है कि अपील प्राप्त होने के बाद 60 दिन के भीतर नियमानुसार उसका निराकरण किया जाए।
तत्काल राहत नहीं, अब विभागीय अपील पर नजर
फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद डॉ. नरेश गुन्नाड़े के निलंबन पर तत्काल रोक नहीं लगी है। अब उनकी अगली उम्मीद विभागीय अपील पर टिकी है। विभागीय स्तर पर होने वाले फैसले से तय होगा कि निलंबन आदेश को बरकरार रखा जाता है या उसमें कोई बदलाव किया जाता है।
यानी मुख्यमंत्री के निलंबन के फैसले को हाई कोर्ट ने अभी रद्द नहीं किया है, बल्कि अधिकारी को पहले विभागीय अपील का रास्ता अपनाने को कहा है।














