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रीवा में जलभराव के बाद बीमारी का खतरा, सरकारी तैयारियों पर फिर उठे सवाल

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रीवा। मूसलाधार बारिश ने रीवा शहर से लेकर त्योंथर क्षेत्र तक जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार दोपहर से शुरू हुई लगातार बारिश के बाद गुरुवार को शहर के कई इलाकों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। निचले इलाकों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया, जिससे कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। लोगों को रातभर पानी निकालने और सामान सुरक्षित करने की जद्दोजहद करनी पड़ी। कई जगह हालात इतने खराब रहे कि सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गईं और लोगों का आवागमन तक मुश्किल हो गया। जलभराव की इन तस्वीरों ने बारिश से पहले की गई प्रशासनिक तैयारियों और शहर की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रीवा में बारिश से जन-जीवन प्रभावित:शहर से त्योंथर तक जलभराव, घर-दुकानों में  घुसा तीन फीट तक पानी - Madhya-pradesh/rewa-heavy-rain-waterlogging-tyonthar-jawa-baikunthpur  - Amar ...

अब जलभराव के बाद बीमारी का खतरा

बारिश का पानी कम होने के बाद प्रशासन के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। लंबे समय तक जमा गंदा पानी, कीचड़ और जगह-जगह फैली गंदगी के कारण संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में केवल पानी निकालना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई, कीटाणुनाशक छिड़काव और स्वास्थ्य निगरानी की भी जरूरत होगी।

सरकारी दावों पर सवाल

बारिश से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ घंटों की तेज बारिश में शहर के कई हिस्सों के जलमग्न होने के बाद उन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठ रहे हैं। अब सवाल है कि अगर बारिश से पहले पर्याप्त इंतजाम किए गए थे, तो इतने बड़े पैमाने पर जलभराव क्यों हुआ? नालों की सफाई में कमी रही या फिर पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था ही नहीं थी?

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जनता को चाहिए समाधान, सिर्फ सफाई नहीं

हालात बिगड़ने के बाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से सफाई दी जा रही है, लेकिन प्रभावित लोगों के सामने सवाल सीधा है—जिम्मेदारी किसकी है? प्रशासन को जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल राहत के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी। जहां लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। क्योंकि बारिश हर साल होगी, लेकिन हर साल शहर को जलभराव और अव्यवस्था के हवाले करना किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था की स्वीकार्य तस्वीर नहीं हो सकती।

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