ग्वालियर। मुख्यमंत्री मोहन यादव के ग्वालियर दौरे के दौरान वीआईपी मूवमेंट के लिए कुछ समय तक यातायात रोके जाने पर विवाद खड़ा हो गया। ट्रैफिक जाम में फंसे एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि वह अपने बीमार बेटे को अस्पताल लेकर जा रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री के काफिले के कारण उसे आगे नहीं जाने दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान नाराज पिता ने मौके पर ही विरोध जताया। वहीं, जाम में फंसे कई अन्य वाहन चालकों ने भी लगातार हॉर्न बजाकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर वीआईपी मूवमेंट और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि सुरक्षा व्यवस्था के बीच आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों और जरूरी कार्य से जा रहे लोगों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। साथ ही वायरल वीडियो में किए जा रहे सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हो सकी है। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ट्रैफिक रोकने की अवधि कितनी थी और आपात स्थिति में फंसे लोगों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।














