Home » लपेटा लेटेस्ट » रतलाम में दूषित पानी से बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत, कई लोग बीमार; प्रशासन ने शुरू कराई जांच

रतलाम में दूषित पानी से बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत, कई लोग बीमार; प्रशासन ने शुरू कराई जांच

Share This Article

मध्य प्रदेश में पेयजल व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से जुड़ी घटना के बाद अब रतलाम जिले के पिपलोदा तहसील अंतर्गत आजमपुर डोडिया गांव में कथित रूप से दूषित पानी पीने से कई ग्रामीणों के बीमार होने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के एक कुएं का पानी पीने के बाद बच्चों और बुजुर्गों समेत कई लोगों को उल्टी, दस्त और तेज बुखार की शिकायत हुई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। मामले की जानकारी मिलते ही जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय, अपर कलेक्टर ब्रजेश रावत, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और संबंधित कुएं का निरीक्षण किया। प्रशासन ने पानी के नमूने प्रयोगशाला भेज दिए हैं। साथ ही ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। पास के गांव से ट्यूबवेल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर ग्रामीणों से पानी उबालकर पीने की अपील की है। साथ ही चिकित्सा दल गांव में स्वास्थ्य परीक्षण कर रहा है और जरूरतमंद लोगों को दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

https://youtu.be/hck9aXM_Q5c

फिर उठे जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल

इस घटना के बाद प्रदेश की ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में भी दूषित पेयजल से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अन्य जिलों में समय रहते जल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में जल स्रोतों की नियमित जांच, क्लोरीनेशन और पाइपलाइन की निगरानी बेहद जरूरी होती है, ताकि जलजनित बीमारियों को रोका जा सके।

एमपी के रतलाम में दूषित पानी का कहर... कुएं का पानी पीते ही 80 से ज्यादा  बीमार, 21 अस्पताल में भर्ती; प्रशासन में हड़कंप

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि पानी की गुणवत्ता की पुष्टि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। यदि जांच में पानी दूषित पाया जाता है, तो संबंधित कारणों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्थायी रूप से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

Live Poll

[democracy id="1"]

Also Read This