गार्ड और नर्स ने धुएं से भरे वार्ड में पहुंचकर बचाए बच्चे
हादसे के बाद अस्पताल में मौजूद परिजनों ने बताया कि आग और धुएं के बीच बच्चों को बचाने के लिए अस्पताल के गार्ड और नर्स सबसे पहले NICU की ओर पहुंचे। अचलपुर निवासी एक बच्चे के पिता योगेश सावर्कर के मुताबिक उनकी पत्नी और आठ दिन का बच्चा अस्पताल में भर्ती था। आग की जानकारी मिलते ही वे पहली मंजिल से अपने बच्चे को लेकर बाहर निकले। उन्होंने बताया कि कई बच्चों के शरीर पर धुएं और राख के निशान दिखाई दे रहे थे। परिजनों का कहना है कि NICU के अंदर इतना धुआं भर गया था कि कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था, इसके बावजूद गार्ड और नर्सों ने अंदर पहुंचकर बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास किया। परिवारों ने अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि आग लगने के बाद वॉटर स्प्रे सिस्टम ने तत्काल काम नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने दिए हाईलेवल जांच के आदेश, परिवारों को 5 लाख की मदद
घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाईलेवल जांच कराने की बात कही है और स्वास्थ्य मंत्री तथा स्वास्थ्य विभाग के सचिव को अमरावती पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले तीनों नवजातों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया है। पुलिस और प्रशासन की टीमें आग लगने की वजह और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।
दो दिन पहले छिंदवाड़ा में भी NICU में लगी थी आग
नवजातों के वार्ड में आग लगने की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में भी दो दिन पहले NICU में आग लगने का मामला सामने आया था। वहां शनिवार देर रात करीब 2 बजे वार्मर मशीन के फिलामेंट से निकली चिंगारी के बाद आग लगी थी। इस हादसे में तीन नवजात झुलस गए थे, जिनमें से एक बच्चे की मौत हो गई। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने अस्पतालों में NICU की फायर सेफ्टी, विद्युत उपकरणों की नियमित जांच और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।