भोपाल/गुजरात: गुजरात में हुए हालिया जहरीली शराब कांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मुख्य आरोपी रईस को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। इस कांड के खुलासे के साथ ही अब ‘मुरैना कनेक्शन’ भी सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।

गुजरात पुलिस को मुखबिरों के जरिए रईस के भोपाल में छिपे होने की पुख्ता जानकारी मिली थी। पुलिस ने बिना देर किए भोपाल के करोंद इलाके में उसके ससुराल पर धावा बोला और आरोपी रईस को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रईस बीते दो महीनों से गुजरात के विभिन्न इलाकों में जहरीली शराब की आपूर्ति (Supply) कर रहा था। पुलिस फिलहाल उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े नामों को खंगाल रही है। जांच के दौरान पुलिस को इस पूरे रैकेट के पीछे मुरैना जिले की भूमिका का पता चला। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जहरीली शराब बनाने का काम मुरैना निवासी नरेंद्र यादव उर्फ ‘डॉक्टर’ करता था। वह रईस और गुजरात के तस्कर गौतम सोलंकी के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को एक सिंडिकेट की तरह चला रहा था। विडंबना देखिए कि जिस नरेंद्र यादव ने यह जहरीली शराब तैयार की थी, वह खुद भी इसका शिकार हो गया। जहरीली शराब के सेवन से ही उसकी भी मौत हो चुकी है, जो कि इस पूरे मामले का सबसे उलझा हुआ पहलू है। पुलिस की सक्रियता के चलते इस मामले में अब तक 21 आरोपियों के नाम सामने आ चुके हैं। इनमें से 13 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि शेष 8 की तलाश में पुलिस की विशेष टीमें विभिन्न राज्यों में दबिश दे रही हैं। पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इन लोगों के पास कच्चा माल कहाँ से आता था और इस काले कारोबार से होने वाली कमाई किन-किन हाथों तक पहुँचती थी। जहरीली शराब के मामलों में मुरैना का नाम आना कोई नई बात नहीं है। करीब 5 साल पहले इसी जिले में हुए एक भीषण शराब कांड में 24 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उस घटना ने पूरे मध्य प्रदेश को हिला दिया था। अब एक बार फिर गुजरात मामले में मुरैना का नाम जुड़ने से स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आ गया है। इस घटना के बाद से मुरैना के आसपास के इलाकों में अवैध शराब के अड्डों के खिलाफ सघन अभियान चलाए जाने की मांग उठने लगी है।
विस्तृत विश्लेषण: जहरीली शराब का नेटवर्क और प्रशासन की चुनौती
गुजरात में हुआ यह जहरीली शराब कांड मात्र एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपराध है। जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले कई महीनों से एक सोची-समझी साजिश के तहत गरीब बस्तियों और दूर-दराज के इलाकों में मिलावटी शराब की खेप पहुंचा रहे थे। इस गिरोह का मुख्य आधार मध्य प्रदेश के मुरैना जिले को बनाया गया था, जहाँ से न केवल शराब की सप्लाई हो रही थी, बल्कि ‘डॉक्टर’ जैसे लोग इसे रसायनों के मिश्रण से तैयार कर रहे थे। इस घटना में 9 लोगों की असामयिक मौत ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य आरोपी रईस की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि इस गिरोह की जड़ें अंतर्राज्यीय (Inter-state) हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय ट्रांजेक्शन और सप्लाई रूट के मैप को तैयार कर रही है ताकि आने वाले समय में ऐसे किसी भी संभावित हादसे को रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि केवल आरोपियों को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ को नष्ट करना जरूरी है। मुरैना में पहले हो चुके 24 मौतों के कांड के बावजूद, इस तरह के अवैध धंधों का फिर से पनपना चिंता का विषय है। अब पुलिस का मुख्य जोर इस बात पर है कि क्या मुरैना के इन तस्करों को किसी बड़े स्थानीय संरक्षण (Political or Administrative backing) का सहारा प्राप्त था? आने वाले दिनों में रईस से होने वाली पूछताछ कई सफेदपोशों और बड़े माफियाओं के चेहरे बेनकाब कर सकती है। इस कांड के बाद गुजरात और मध्य प्रदेश की पुलिस मिलकर एक साझा रणनीति पर काम कर रही है, ताकि इस जहरीली शराब के खेल को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।














