उज्जैन। नागपंचमी के अवसर पर उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। साल में केवल एक दिन खुलने वाले इस मंदिर में दर्शन के लिए सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतारों में खड़े थे। इसी दौरान हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास अचानक करंट फैलने की अफवाह से श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और देखते ही देखते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि बैरिकेडिंग के अंदर डीपी के पास करंट फैलने की बात कतार में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच तेजी से फैली। इसके बाद लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे। अचानक मची अफरा-तफरी में कई श्रद्धालु गिर गए और कुछ लोग बैरिकेडिंग से टकरा गए। घटना के चलते मौके पर कुछ देर के लिए दर्शन व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

अफवाह से घबराए श्रद्धालु, बैरिकेडिंग से टकराए
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक श्रद्धालु काफी देर से दर्शन के लिए कतार में खड़े थे। इसी दौरान डीपी के पास करंट आने की बात कही गई। इसके बाद कतार में मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ अधिक होने के कारण लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कई श्रद्धालु एक-दूसरे से टकराकर गिर पड़े। कुछ श्रद्धालुओं को बैरिकेडिंग से टकराने के कारण चोटें आईं।घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को शांत कराया और भीड़ को व्यवस्थित करने की कोशिश की।
चरक अस्पताल में भर्ती कराए गए घायल
घटना के बाद घायल श्रद्धालुओं को तत्काल उपचार के लिए चरक अस्पताल पहुंचाया गया। सामने आई जानकारी के मुताबिक घायलों में उज्जैन के अलावा ग्वालियर, गुजरात और बिहार से आए श्रद्धालु भी शामिल हैं। घायलों में हिंदू बाई निवासी ढांचा भवन उज्जैन, सागर पुत्र मनीष उम्र 19 वर्ष निवासी किशनपुरा, लक्ष्मीबाई निवासी ढांचा भवन, अनसूया और उनकी मां ममता निवासी गंजबासौदा, हरिश्चंद्र निवासी सिलवासा-वापी गुजरात, सोनम उम्र 18 वर्ष निवासी ग्वालियर, सुजीत कुमार निवासी दरभंगा बिहार, खुशी निवासी ग्वालियर तथा तुलसी और उनकी मां रेखाबाई निवासी वलसाड गुजरात के नाम सामने आए हैं। बताया गया कि भगदड़ के दौरान बैरिकेडिंग से टकराने के कारण हरिश्चंद्र के पैरों में गंभीर चोट आई है। अन्य श्रद्धालुओं को भी चोटें लगी हैं। सभी का चरक अस्पताल में उपचार जारी बताया गया है।
प्रशासन ने संभाली स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थिति को नियंत्रित करने के साथ ही श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखने के लिए व्यवस्था संभाली गई। अचानक फैली अफवाह के कारण कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं के बीच डर और दहशत का माहौल बन गया था। प्रशासन की मौजूदगी के बाद स्थिति सामान्य की गई और दर्शन व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, डीपी के पास वास्तव में विद्युत करंट की कोई समस्या थी या केवल अफवाह के कारण भगदड़ मची, इसको लेकर आधिकारिक तौर पर पूरी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। मामले की जांच के बाद ही घटना की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।]
साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट
महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। नागपंचमी पर मंदिर के कपाट खुलने के बाद यहां दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। इसी वजह से मंदिर और आसपास के मार्गों पर भारी भीड़ रहती है। नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की शेषनाग के फनों के नीचे विराजमान दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। नागपंचमी पर इस मंदिर के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
भारी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
साल में सिर्फ एक दिन दर्शन के लिए खुलने वाले मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में करंट जैसी अफवाह से भगदड़ की स्थिति बनना प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय है। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच विद्युत व्यवस्था, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण की तैयारियों की निगरानी किस तरह की जा रही थी? फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को संभाल लिया है। घायलों का इलाज जारी है और घटना की वास्तविक वजह को लेकर तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।














