दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पटेरा स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान पूर्व महिला प्राचार्य के भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मंच से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पूर्व प्राचार्य वंदना गुप्ता ने पढ़ाई को लेकर नसीहत दी, लेकिन इसी दौरान उनकी टिप्पणी वर्तमान प्राचार्य कमलेश शर्मा पर कथित तंज के रूप में सामने आई। वीडियो में पूर्व प्राचार्य विद्यार्थियों से कहती हुई नजर आ रही हैं कि वे इतना पढ़ें कि भविष्य में उन्हें पैसा देकर सीनियर को दरकिनार कर पद हासिल करने जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उनके इस बयान को वर्तमान प्राचार्य की नियुक्ति और हाल ही में हुए प्रभार परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है।

मंच से वर्तमान प्राचार्य पर लगाए गंभीर आरोप
वायरल वीडियो में पूर्व प्राचार्य ने वर्तमान प्राचार्य पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार के जरिए पद हासिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने विद्यार्थियों को उदाहरण देते हुए पढ़ाई करने की बात कही और कहा कि भविष्य में उन्हें किसी वरिष्ठ को पीछे छोड़कर पद हासिल करने के लिए पैसे देने की जरूरत न पड़े। इस दौरान मंच पर विद्यालय के शिक्षक और अन्य लोग भी मौजूद थे। वीडियो में विद्यार्थियों की ओर से तालियां बजाते हुए भी सुना जा सकता है। हालांकि, पूर्व प्राचार्य द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
दो दिन पहले ही बदला था प्राचार्य का प्रभार
बताया जा रहा है कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से करीब दो दिन पहले ही वरिष्ठ शिक्षिका वंदना गुप्ता से प्राचार्य का प्रभार लेकर कनिष्ठ शिक्षक कमलेश शर्मा को प्राचार्य बनाया गया था। इसी घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में पूर्व प्राचार्य के भाषण को देखा जा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में टिप्पणी से चर्चा तेज
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के कार्यक्रम में मंच से लगाए गए कथित आरोपों के बाद विद्यालय में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मामला अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रहा है। अब सवाल यह है कि प्राचार्य पद का प्रभार बदलने के पीछे वास्तविक प्रक्रिया और कारण क्या थे? क्या पूर्व प्राचार्य द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों में कोई तथ्य है या यह केवल पद परिवर्तन को लेकर उनकी नाराजगी थी? फिलहाल पूरे मामले में शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक जांच या कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि आरोपों में तथ्य हैं तो जांच के बाद जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित पक्ष को अपना स्पष्टीकरण देने का अवसर मिलना चाहिए।














