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इंदौर में 8 साल बाद भी अधूरा स्कूल भवन, जर्जर बिल्डिंग में पढ़ने को मजबूर 100 बच्चे

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इंदौर। शहर में स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सदर बाजार क्षेत्र के शासकीय एकीकृत विद्यालय क्रमांक-39 की तस्वीर सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। वर्ष 2018 में करीब 90 लाख रुपये की लागत से शुरू हुआ स्कूल भवन निर्माण कार्य आठ साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है।नया भवन तैयार नहीं होने के कारण करीब 100 विद्यार्थी आज भी करीब 70 साल पुराने जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। भवन की हालत इतनी खराब है कि बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है और हादसे की आशंका बनी रहती है।

90 लाख की लागत से शुरू हुआ था निर्माणइंदौर में आठ साल में भी नहीं बन सका स्कूल, जान हथेली पर लेकर जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे

स्मार्ट सिटी योजना के तहत वर्ष 2018 में स्कूल के लिए नया दो मंजिला भवन बनाने का काम शुरू किया गया था। करीब 90 लाख रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का काम पहले ठेकेदार ने अधूरा छोड़ दिया। इसके बाद टेंडर निरस्त कर दूसरे ठेकेदार को काम सौंपा गया, लेकिन इसके बावजूद भवन पूरा नहीं हो पाया।

विडंबना यह है कि जिस भवन को बच्चों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाया जाना था, वह लोकार्पण से पहले ही जर्जर होने लगा है। भवन की खिड़कियां और दरवाजे गायब हैं, फ्लोरिंग टूट चुकी है और छत का काम भी अधूरा है। कई जगह सरिए बाहर निकल आए हैं।

पुराने भवन में भी हालात खराब

नया भवन तैयार नहीं होने के कारण स्कूल अभी पुराने भवन में ही संचालित हो रहा है। टीन की छत वाले इस भवन में बारिश के दौरान जगह-जगह पानी टपकता है। शिक्षकों के अनुसार यहां महिला शिक्षकों के लिए उचित वॉशरूम तक की व्यवस्था नहीं है।

स्कूल में आठवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। आसपास की गरीब बस्तियों से बच्चे यहां पढ़ने आते हैं, लेकिन जर्जर भवन की स्थिति के कारण अभिभावकों और शिक्षकों के सामने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

स्मार्ट सिटी के कामों पर फिर उठे सवाल

स्मार्ट सिटी कंपनी ने इंदौर में 100 से ज्यादा विकास कार्य किए हैं। गांधी हॉल, एमजी रोड और नेहरू पार्क समेत कई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। इन कार्यों की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

अब आठ साल से अधूरे पड़े स्कूल भवन ने स्मार्ट सिटी के विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्कूल भवन के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं, तो आखिर बच्चों को सुरक्षित और नया स्कूल भवन कब मिलेगा?

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