सिवनी मालवा। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से ग्रामीण इलाकों में बदहाल आवागमन व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। सिवनी मालवा तहसील के ग्राम पंचायत नंदरवाड़ा के सांटया मउ टोला में वर्षों से ग्रामीण सुरक्षित रास्ते के लिए तरस रहे हैं। बारिश आते ही करीब 250 लोगों की जिंदगी खारदी नदी के बढ़ते जलस्तर पर निर्भर हो जाती है।सोमवार को इस समस्या की गंभीरता तब सामने आई, जब सांटया मउ निवासी करीब 85 वर्षीय सुंदरिया बाई के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा लगभग 3 फीट गहरे पानी के बीच से निकालनी पड़ी। परिजन और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पानी पार करते हुए पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए लेकर गए।

अंतिम यात्रा के लिए भी नहीं मिला सुरक्षित रास्ता
सांटया मउ टोला में करीब 50 घर हैं, जिनमें लगभग 250 लोग रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक टोले तक पहुंचने के लिए आज तक कोई पक्का और सुरक्षित रास्ता नहीं बन पाया है।गर्मी के मौसम में नदी में पानी कम होने पर किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश के दिनों में खारदी नदी का जलस्तर बढ़ते ही ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इसके बावजूद उन्हें रोजमर्रा के काम, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।सोमवार को सुंदरिया बाई की अंतिम यात्रा भी इसी रास्ते से निकालनी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि पूरे टोले की वर्षों पुरानी समस्या है।
बीमारी हो या डिलीवरी, हर वक्त बना रहता है खतरा
ग्रामीणों के मुताबिक सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को होती है। बारिश के दौरान यदि किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ जाए तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

कई बार शिकायत, फिर भी नहीं बनी पुलिया
ग्रामीणों का आरोप है कि सांटया मउ टोला की समस्या को लेकर कई बार शासन-प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। लंबे समय से नदी पर पुलिया या सुरक्षित आवागमन मार्ग बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सुरक्षित रास्ता नहीं बनता, तब तक हर बारिश में यही खतरा बना रहेगा।

अंतिम यात्रा की तस्वीर ने फिर उठाए सवाल
एक बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा को करीब 3 फीट पानी के बीच से निकालने की तस्वीर ने प्रशासन के सामने एक बार फिर ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या खड़ी कर दी है।अब ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए सांटया मउ टोला के लिए स्थायी और सुरक्षित सड़क या पुलिया का निर्माण कराए, ताकि बारिश के दिनों में किसी को आवागमन के लिए अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।सवाल सीधा है—जब किसी गांव में अंतिम यात्रा तक सुरक्षित रास्ते से नहीं निकल सकती, तो आखिर विकास के दावे जमीन पर कितने सच हैं?














