इस खबर को वेबसाइट के लिए थोड़ा ज्यादा प्रभावी और न्यूज़ पोर्टल की शैली में ऐसे लिखा जा सकता है:नई दिल्ली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अब देशभर में सैनिकों के सम्मान और सेवा के लिए रक्तदान का संदेश दिया जा रहा है। दिल्ली में आयोजित ‘सिंदूर आर्मी महा ब्लड डोनेशन यात्रा’ के दूसरे वर्ष के अभियान में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए। उन्होंने रक्तदान को देश के जवानों के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि देश की सेवा में घायल होने वाला कोई भी सैनिक रक्त की कमी से नहीं जूझना चाहिए।ऑपरेशन सिंदूर शौर्य, रक्तदान करुणा का प्रतीकराजनाथ सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत के सैन्य पराक्रम और वीरता का प्रतीक रहा, जबकि ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ देश की करुणा और संवेदनशीलता को दर्शाती है।उन्होंने कहा कि सैनिक सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगाते हैं। ऐसे में नागरिकों का भी दायित्व है कि जरूरत पड़ने पर रक्तदान कर घायल जवानों की मदद करें।
‘एक भी जवान खून की कमी से न जूझे’
रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस तरह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने सीमा पार जाकर दुश्मनों को जवाब दिया, उसी तरह अब देश के भीतर नागरिक सेवा और संवेदना के माध्यम से अपना योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने संकल्प दोहराते हुए कहा कि देश की सेवा करते हुए घायल होने वाले किसी भी सैनिक को रक्त की कमी का सामना नहीं करना पड़े। उनके मुताबिक, यही भावना देश के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी और भारत की संवेदनशीलता को दर्शाती है।
जवानों की सेवा में नागरिकों की भागीदारी
राजनाथ सिंह ने रक्तदान अभियान को केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सैनिकों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी से जोड़ते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सीमा पर जवान देश की रक्षा करते हैं, वहीं नागरिक रक्तदान जैसे कार्यों के जरिए उनके साथ खड़े हो सकते हैं। ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ इसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास है।














