उज्जैन। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों में मध्य प्रदेश पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। इस बार करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिहेवियरल साइंस और क्राउड साइकोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों को ड्यूटी से कई महीने पहले ही उनके निर्धारित घाट, मंदिर, मार्ग और सेक्टर की लोकेशन-स्पेसिफिक ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें क्षेत्र के चोक पॉइंट्स, रेस्क्यू रूट्स और भीड़ के मूवमेंट पैटर्न की विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से पहले ही प्रभावी कदम उठाए जा सकें। उज्जैन जोन के एडीजी राकेश गुप्ता के मुताबिक, सिंहस्थ को केवल कानून-व्यवस्था का आयोजन नहीं, बल्कि एक डेटा-आधारित स्मार्ट पुलिसिंग मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों को छोटे-छोटे ऑपरेशनल जोन में बांटा जाएगा और हर अधिकारी को उसी क्षेत्र के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। नई रणनीति में AI आधारित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का उपयोग कर भीड़ बढ़ने, संभावित जाम और जोखिम वाले स्थानों की पहले से पहचान की जाएगी। उद्देश्य यह है कि किसी भी भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति बनने से पहले ही उसे रोका जा सके।

सिंहस्थ 2028 पुलिसिंग के प्रमुख बिंदु
- लोकेशन-स्पेसिफिक ट्रेनिंग के जरिए अधिकारियों को पहले से क्षेत्र की पूरी जानकारी दी जाएगी।
- AI आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग से भीड़ और चोक पॉइंट्स पर लगातार नजर रखी जाएगी।
- प्रिवेंटिव पुलिसिंग मॉडल अपनाकर हादसों को पहले ही रोकने पर फोकस रहेगा।
मध्य प्रदेश पुलिस का मानना है कि तकनीक, डेटा और व्यवहार विज्ञान के समन्वय से सिंहस्थ 2028 को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।














