मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से विकास के दावों को कठघरे में खड़ा करने वाली तस्वीर सामने आई है। अंबाह जनपद की ग्राम पंचायत सिकारोड़ी से रामरतन के पुरा तक जाने वाला करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा मार्ग बरसात के दिनों में पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों तक सभी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच कीचड़ से भरी सड़क पर खड़ी एक मासूम बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह मुख्यमंत्री से सड़क बनवाने की भावुक अपील करती नजर आ रही है।

वीडियो में बच्ची कहती है, “मुख्यमंत्री जी, आप दिनभर बोलते हो बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ… रोड ही नहीं होगी तो बेटी कैसे पढ़ेगी? ये रोड देख रहे हो ना… पूरी खराब है। इस रोड को खुद ही संभाल लो, हमसे नहीं संभाली जा रही। आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है। प्लीज, इसे जल्द बनवा दो।” मासूम की यह अपील अब गांव की वर्षों पुरानी समस्या की आवाज बन गई है।स्थानीय लोगों के अनुसार, बरसात शुरू होते ही सड़क पूरी तरह कीचड़ से भर जाती है। जगह-जगह गड्ढों और फिसलन के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है। कई बच्चे रोज फिसलते हैं, उनके कपड़े और किताबें खराब हो जाती हैं। कई अभिभावक हादसे के डर से बारिश के मौसम में बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर देते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। मरीजों को चारपाई, बाइक या ट्रैक्टर-ट्रॉली के सहारे मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए यह रास्ता किसी जोखिम से कम नहीं है। लगातार बारिश होने पर पूरा गांव लगभग संपर्कविहीन हो जाता है।ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के बाद से इस सड़क का स्थायी निर्माण नहीं हुआ। वर्षों से पंचायत, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को आवेदन दिए जा रहे हैं। हर चुनाव में सड़क निर्माण का आश्वासन मिलता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे भी खत्म हो जाते हैं।
गौरतलब है कि यह मार्ग दिमनी विधानसभा क्षेत्र में आता है, जिसका प्रतिनिधित्व मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर करते हैं। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रदेश के एक प्रमुख जनप्रतिनिधि के क्षेत्र में डेढ़ किलोमीटर सड़क तक नहीं बन पा रही, तो ग्रामीण विकास के दावों पर कैसे भरोसा किया जाए।वहीं, पंचायत की ओर से कहा गया है कि सड़क निर्माण का प्रस्ताव कई बार संबंधित विभाग को भेजा जा चुका है। पंचायत का कहना है कि सड़क निर्माण उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और विभागीय स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि मासूम बच्ची की भावुक अपील के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान करेंगे।














