वैशाली। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर दियारा इलाके में नाव पलटने की घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में 13 बच्चों की मौत की खबर है। घटना में बचाए गए चार बच्चों ने बताया कि नाव में पहले से छेद था, जिसके कारण धीरे-धीरे पानी भरने लगा। कुछ दूर आगे बढ़ने के बाद पानी तेजी से अंदर आने लगा और आखिरकार नाव पलट गई।
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श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे ग्रामीण
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 8:30 बजे रामपुर श्यामचंद गांव के लोग नदी के दूसरी ओर स्थित गांव में श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव हादसे का शिकार हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बचाव की कोशिशें शुरू हुईं।
बच्चों ने बताया, नाव में पहले से था छेद
हादसे से बचाए गए बच्चों के मुताबिक, नाव में एक छोटा छेद था, जिससे पानी अंदर आने लगा। नाव में सवार एक व्यक्ति पानी बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आगे बढ़ने के साथ पानी तेजी से भरने लगा। देखते ही देखते नाव में काफी पानी जमा हो गया और वह पलट गई। अंश ने बताया कि नाव में पानी भरने के बाद हालात बिगड़ते चले गए। वहीं अभिराज के अनुसार, नाव पलटने से पहले ही वह पानी में कूद गया था। उसके दादाजी ने उसे बचाया, लेकिन उसके साथ मौजूद अन्य लोगों के डूबने की बात उसने बताई।
आदित्य ने सुनाई बचने की कहानी
आदित्य कुमार ने बताया कि हादसे के दौरान उसने एक व्यक्ति के पैर पकड़ लिए। उस व्यक्ति ने उसे अपने कंधों पर उठा लिया। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने पेड़ की मोटी टहनी पकड़ने में मदद की और तैरकर उसे नदी के किनारे तक पहुंचाया। आदित्य के मुताबिक, इसी मदद से उसकी जान बच सकी। अश्विनी कुमार ने बताया कि नाव में करीब 25 लोग सवार थे और उसके दादाजी ने उसे बचाया। वहीं अभिराज ने नाव में लगभग 20 लोगों के होने की बात कही। बच्चों के बयानों में सवार लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है।
नाव की सुरक्षा और क्षमता पर उठे सवाल
बच्चों के बयानों के मुताबिक, नाव में छेद से पानी भरना हादसे की अहम वजह हो सकती है। हालांकि, नाव की वास्तविक स्थिति, उसमें सवार लोगों की सही संख्या और दुर्घटना के अन्य कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इस घटना ने नदी पार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नावों की सुरक्षा, उनकी क्षमता और रात के समय आवागमन के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों में शोक का माहौल है।













