झाबुआ। जिले के ग्राम मिंडल से खाद की किल्लत और अव्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक किसान पिछले चार दिनों से खाद लेने के लिए लाइन में खड़ा है, लेकिन अब तक उसे खाद नहीं मिल सकी। इस दौरान किसान के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर बदसलूकी किए जाने का आरोप भी सामने आया है। किसानों का कहना है कि बारिश और खेती के इस महत्वपूर्ण समय में फसल को बचाने के लिए खाद की जरूरत है, लेकिन खाद वितरण केंद्रों पर लंबी कतारों के बावजूद पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। किसान घंटों नहीं, बल्कि कई-कई दिनों तक लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसान चार दिन तक खाद के लिए लाइन में खड़ा रहे और फिर भी उसके हाथ खाली रहें, तो आखिर खाद वितरण की व्यवस्था किसके लिए है? किसानों का आरोप है कि उन्हें अपनी जरूरत की खाद समय पर नहीं मिल रही, जिससे फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसी बीच किसान के साथ पुलिस द्वारा कथित बदसलूकी का मामला सामने आने के बाद नाराजगी और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि समस्या का समाधान करने के बजाय यदि उनके साथ सख्ती या दुर्व्यवहार किया जाएगा, तो उनकी परेशानी और बढ़ेगी। किसानों का सीधा सवाल है—अगर खाद समय पर नहीं मिली और इसकी वजह से फसल खराब हुई, तो किसान के नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
खाद वितरण केंद्रों पर बढ़ती भीड़ और लंबी कतारों ने प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मांग है कि पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित किया जाए और किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। किसानों का कहना है कि उन्हें किसी तरह की मेहरबानी नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए समय पर खाद, पारदर्शी वितरण व्यवस्था और सम्मान के साथ व्यवहार। अब देखना होगा कि मिंडल गांव में किसानों की इस परेशानी पर प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और खाद की समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।














