इंदौर। पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में पदस्थ प्रधान आरक्षक फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त ने जांच तेज कर दी है। लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीम ने सुबह करीब 6 बजे इंदौर और देवास में एक साथ 15 ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की। शुरुआती जांच में करीब 6 करोड़ 26 लाख रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का आकलन किया गया है।
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अनुमानित आय और संपत्ति में बड़ा अंतर
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, प्रधान आरक्षक को वेतन से अब तक करीब 75 लाख रुपये की आय होने का अनुमान है। अन्य स्रोतों से आय जोड़कर कुल आय लगभग 1 करोड़ 93 लाख रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले जांच में करीब 6 करोड़ 26 लाख रुपये की संपत्ति सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यह संपत्ति अनुमानित आय से लगभग 223 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।
मां और पत्नी के नाम की फर्म भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान आरोपी की मां और पत्नी के नाम पर साहिल ट्रेडिंग कंपनी नाम की फर्म होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। फर्म के बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेन-देन की भी जांच की जा रही है। इसके साथ ही रियल एस्टेट में निवेश और परिचित महिला रोशनी वर्मा के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों से जुड़े पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।
बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच से खुल सकते हैं नए तथ्य
फिलहाल कार्रवाई शुरुआती चरण में है। लोकायुक्त की सर्चिंग के दौरान मिले दस्तावेजों, संपत्ति के रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन का सत्यापन किया जाएगा। बैंक खातों और लॉकर से संबंधित जानकारी भी जांच के निष्कर्षों को प्रभावित कर सकती है, हालांकि वहां से किसी बड़ी रकम या अन्य संपत्ति की बरामदगी की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
लोकायुक्त की कार्रवाई का उद्देश्य आय के ज्ञात स्रोतों और कथित तौर पर अर्जित संपत्तियों के बीच अंतर की पड़ताल करना है। सर्चिंग और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद संपत्तियों के वास्तविक मूल्य, धन के स्रोत और संदिग्ध लेन-देन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सामने आए आंकड़े प्रारंभिक आकलन हैं; मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा।













