नई दिल्ली: लोकसभा ने बुधवार को ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया। सदन में इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राहुल गांधी ने करीब 50 मिनट के भाषण में पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के आंदोलन का मुद्दा उठाया। भाषण के दौरान उन्होंने “इडियट” और “अंधभक्त” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कई बार हस्तक्षेप करते हुए राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उन्हें असंसदीय भाषा के प्रयोग पर बार-बार टोका। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है और शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को “सिर्फ दिखावा” बताते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दों पर सरकार जवाबदेही से बच रही है। इस दौरान राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्रालय की भूमिका सवालों के घेरे में रही। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की, जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया। लगातार दूसरे दिन चली चर्चा के बाद अंततः लोकसभा ने पेपर लीक से जुड़े संशोधन विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि नए कानून से सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ और अधिक सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।














