नई दिल्ली | जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देशभर के 52 प्रमुख राजनीतिक नेताओं को पत्र लिखकर आमंत्रित किया है। आमंत्रित नेताओं में सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, मायावती, लालू प्रसाद यादव, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, अरविंद केजरीवाल, एम.के. स्टालिन, सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय), वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी, के. चंद्रशेखर राव, असदुद्दीन ओवैसी, सुखबीर सिंह बादल, डी. राजा और कपिल सिब्बल सहित कई अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं। फारूक अब्दुल्ला ने अपने पत्र में कहा कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का दर्जा समाप्त करने के दौरान केंद्र सरकार ने संसद में उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया था। उनका कहना है कि वर्ष 2024 में विधानसभा चुनाव और नई सरकार बनने के बावजूद यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक होगा। प्रदर्शन का उद्देश्य कोई नई मांग उठाना नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को संसद में किए गए अपने वादे की याद दिलाना है।

पार्टी का मानना है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की संघीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। अब सभी की नजरें मानसून सत्र के पहले दिन होने वाले इस प्रदर्शन और उस पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।














