भोपाल/छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहा ‘चिता आंदोलन’ बुधवार को छठे दिन भी जारी रहा। भारी बारिश के बावजूद आदिवासी, किसान और ग्रामीण आंदोलन स्थल पर डटे रहे। आंदोलन को नया रूप देते हुए प्रदर्शनकारियों ने नदी में उतरकर जल सत्याग्रह भी शुरू कर दिया। लगातार हो रही बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच जल सत्याग्रह को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिससे किसी भी अप्रिय घटना का खतरा बना हुआ है। आंदोलन स्थल पर सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका अनशन तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है, जबकि विस्थापित ग्रामीणों का मिट्टी सत्याग्रह दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर पेयजल की व्यवस्था बंद कर दी है। उनका कहना है कि इसके कारण महिलाएं, बच्चे और अन्य आंदोलनकारी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे कई लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन समस्याओं के समाधान के बजाय आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास, परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा विस्थापितों के कथित उत्पीड़न पर रोक शामिल है।














