ग्राउंड रिपोर्ट। पेट्रोल में बढ़ती एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकार जहां इसे ईंधन बचत, आयात में कमी और पर्यावरण के लिहाज से बड़ा कदम बता रही है, वहीं जमीनी स्तर पर कई वाहन चालकों की चिंताएं भी सामने आने लगी हैं। लपेटा संवाददाता आदर्श पांडे ने शहर में ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कार और बाइक चालकों से बातचीत की, जिसमें लोगों ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर अपने अनुभव साझा किए। कई वाहन चालकों ने माइलेज कम होने, इंजन की परफॉर्मेंस पर असर पड़ने और पुराने वाहनों में दिक्कत बढ़ने जैसी बातें कहीं। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान बाइक सवारों और कार चालकों से बात की गई तो सामने आया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर राय एक जैसी नहीं है, लेकिन एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो इसे लेकर असहज नजर आया। कुछ लोगों ने कहा कि पहले की तुलना में माइलेज कम महसूस हो रहा है, जबकि कुछ वाहन मालिकों का कहना था कि इंजन की स्मूदनेस और पिकअप में फर्क दिखाई दे रहा है। खासकर पुराने मॉडल की बाइक और कार चलाने वाले लोगों ने यह आशंका जताई कि लंबे समय तक ऐसे ईंधन के इस्तेमाल से इंजन पार्ट्स पर असर पड़ सकता है। ग्राउंड रिपोर्ट में शामिल कई वाहन चालकों ने दावा किया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल डालने के बाद उनकी गाड़ी पहले जितनी दूरी तय नहीं कर पा रही है। कुछ बाइक चालकों ने कहा कि पेट्रोल जल्दी खत्म होता महसूस होता है, जबकि कार मालिकों ने भी माइलेज घटने की शिकायत की। हालांकि, यह अनुभव सभी का एक जैसा नहीं था, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने माना कि उन्हें पहले के मुकाबले अंतर महसूस हो रहा है। कई वाहन मालिकों ने यह भी कहा कि अगर पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ रही है तो वाहन कंपनियों और सरकार को उपभोक्ताओं को साफ-साफ बताना चाहिए कि इसका असर किस तरह की गाड़ियों पर पड़ सकता है। लोगों का कहना था कि नई तकनीक वाली गाड़ियों में शायद इसका असर कम हो, लेकिन पुरानी बाइक और कारों के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है।














