बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की घोषणा ने बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। उनकी संभावित उम्मीदवारी के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारतीय जनता पार्टी अपनी पारंपरिक रणनीति में बदलाव कर कोई नया सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करेगी। प्रशांत किशोर ने एक मीडिया बातचीत में दावा किया कि बांकीपुर, जो पिछले करीब 45 वर्षों से भाजपा का गढ़ रहा है, वहां भाजपा के कई समर्थक मौजूदा सरकार से नाराज हैं और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई मतदाता उन्हें समर्थन देने की बात कह रहे हैं। इधर भाजपा के सामने उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नया प्रयोग कर सकती है। इससे पहले भी भाजपा ने पटना की अन्य विधानसभा सीटों पर पारंपरिक जातीय समीकरणों से हटकर उम्मीदवार उतारे थे और सफलता हासिल की थी। बांकीपुर सीट पर अब यह चर्चा भी तेज है कि क्या भाजपा इस बार कायस्थ समाज के बजाय किसी पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार पर दांव लगाएगी। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। उम्मीदवार के चयन का अंतिम निर्णय केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा लिया जाएगा। उधर, इस उपचुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ हाल के चर्चित घटनाक्रमों के चुनावी असर पर भी नजर रहेगी। राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं, जबकि नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। अब सबकी निगाहें भाजपा के उम्मीदवार चयन और प्रशांत किशोर की आधिकारिक चुनावी रणनीति पर टिकी हैं, क्योंकि बांकीपुर उपचुनाव इस बार राज्य की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल होता दिखाई दे रहा है।














