शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक देवेंद्र जैन और एक युवक के बीच तीखी बहस हो गई। बातचीत के दौरान विधायक ने युवक से पूछा, “तो क्या मैं गधा हूं?” युवक ने जवाब दिया, “हां, आप गधे हो।” बहस का यह हिस्सा अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

‘मैं ग्रेजुएट हूं’ से शुरू हुई तीखी बहस
जानकारी के मुताबिक, OBC महासभा के कार्यकर्ता 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर शिवपुरी कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। इसी दौरान शिवपुरी से भाजपा विधायक देवेंद्र जैन भी वहां मौजूद थे। विधायक और एक युवक के बीच किसी मुद्दे पर बहस होने लगी। वीडियो में युवक अपनी बात रखते हुए कहता सुनाई देता है कि वह ग्रेजुएट है। इस पर विधायक सवाल करते हैं, “तो क्या मैं गधा हूं?” युवक का जवाब था, “हां, आप गधे हो।” युवक के जवाब के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने तालियां बजाईं। इसके बाद विधायक वहां से चले गए।
27 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग
प्रदर्शन में शामिल OBC महासभा के लोगों ने राज्य में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे देश के नागरिक हैं और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने का उन्हें अधिकार है। प्रदर्शन में पोहरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक कैलाश कुशवाह भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरक्षण के मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।
कलेक्टर के ज्ञापन लेने नहीं पहुंचने पर नाराजगी
प्रदर्शनकारियों की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि कलेक्टर ज्ञापन लेने के लिए खुद मौके पर नहीं पहुंचे। उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन का प्रमुख होने के नाते कलेक्टर को प्रदर्शनकारियों से मिलकर उनकी बात सुननी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन, कलेक्टर, विधायक देवेंद्र जैन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारे लगाए गए।
आरक्षण की मांग के बीच राजनीतिक बहस चर्चा में
शिवपुरी में प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने की मांग था, लेकिन विधायक और युवक के बीच हुई बहस ने भी लोगों का ध्यान खींचा। अब इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों की मांग और प्रशासन की प्रतिक्रिया अलग विषय हैं, जबकि वायरल वीडियो में सामने आया संवाद राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। आरक्षण की वर्तमान कानूनी स्थिति और ज्ञापन पर प्रशासन की आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।













