पन्ना। मझगवां बांध परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के मुआवजे और अन्य अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। लंबे समय से लंबित मांगों के निराकरण को लेकर समाजसेवी अमित भटनागर के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण धरने पर बैठ गए। आंदोलन में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई बार प्रशासन से आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
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बांध का पानी घरों तक पहुंचने का ग्रामीणों का दावा
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि बांध परियोजना के चलते प्रभावित परिवारों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ स्थानों पर बांध का पानी उनके घरों तक पहुंचने की स्थिति बन रही है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके घर, जमीन और आजीविका से जुड़े मामलों का उचित समाधान किया जाए और पात्र परिवारों को नियमानुसार मुआवजा तथा पुनर्वास से जुड़े अधिकार दिए जाएं।

आश्वासन के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
ग्रामीणों के मुताबिक पूर्व में प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया था। लेकिन उनका आरोप है कि समय बीतने के बावजूद जमीन पर अपेक्षित कार्रवाई नजर नहीं आई। आंदोलनकारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी जब स्थिति जस की तस रही तो उनका प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता गया। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि वे किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि अपने अधिकारों और न्याय की मांग कर रहे हैं।
मुआवजे के नाम पर पैसे मांगने के आरोप
धरने के दौरान कुछ ग्रामीणों ने मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया में अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित तौर पर पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अमित भटनागर बोले- स्थायी समाधान तक जारी रहेगा आंदोलन
समाजसेवी अमित भटनागर ने कहा कि मझगवां बांध से प्रभावित परिवार लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि आदिवासी परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और उनके वैधानिक अधिकार दिलाए जाएं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि जब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकलता, आंदोलन जारी रहेगा।
तहसील स्तर पर भ्रष्टाचार के भी आरोप
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पन्ना जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अमित भटनागर और अन्य आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि तहसील स्तर पर लोगों को अपने काम कराने के लिए कथित तौर पर पैसे देने पड़ते हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से ऐसी शिकायतों की जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई की मांग
मझगवां बांध विस्थापितों के आंदोलन ने एक बार फिर मुआवजे, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के अधिकारों का मुद्दा प्रशासन के सामने खड़ा कर दिया है। खास बात यह है कि धरने में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई और स्थायी समाधान चाहिए। अब सवाल यही है कि वर्षों से मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे इन परिवारों की समस्या का समाधान कब होगा और प्रशासन इस बार आंदोलनकारियों को सिर्फ आश्वासन देगा या जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई भी दिखाई देगी?













