खाचरौद (उज्जैन)। फसल बीमा की राशि के भुगतान और बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों का गुस्सा शुक्रवार को खाचरौद की सड़कों पर दिखाई दिया। भाजपा के पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत के नेतृत्व में किसानों ने बड़ा प्रदर्शन करते हुए ट्रैक्टर रैली निकाली। आयोजकों के मुताबिक रैली में 1500 से अधिक ट्रैक्टर शामिल हुए। ट्रैक्टरों का लंबा काफिला सड़कों पर निकला तो किसान अपनी मांगों के साथ नारेबाजी करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने के बावजूद कई किसानों को अब तक बीमा की राशि नहीं मिली है। किसानों ने बीमा कंपनियों की प्रक्रिया और भुगतान में कथित देरी पर नाराजगी जताते हुए तत्काल समाधान की मांग की।

प्रीमियम लेने में तेजी, भुगतान में देरी पर किसानों का सवाल
किसानों का कहना है कि फसल बीमा के समय प्रीमियम की राशि समय पर काट ली जाती है, लेकिन जब प्राकृतिक आपदा के बाद नुकसान की भरपाई की बारी आती है तो सर्वे, तकनीकी आपत्तियों और दस्तावेजी प्रक्रिया के नाम पर भुगतान अटक जाता है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सवाल उठाया कि यदि उनका नुकसान निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया जा चुका है, तो स्वीकृत राशि उनके खातों तक पहुंचने में देरी क्यों हो रही है। किसानों की मांग है कि फसल नुकसान का निष्पक्ष आकलन कराया जाए और जो किसान बीमा राशि के पात्र हैं, उन्हें जल्द भुगतान किया जाए।
पूर्व विधायक शेखावत का आंदोलन तेज करने का संकेत
रैली का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक दिलीप सिंह शेखावत ने किसानों के मुद्दे पर सरकार और संबंधित बीमा कंपनियों से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि पात्र किसानों को उनका हक मिलना चाहिए और यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। शेखावत के इस शक्ति प्रदर्शन ने स्थानीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों की मौजूदगी के जरिए उन्होंने किसानों के मुद्दे पर अपनी सक्रियता को सामने रखा।

‘मुख्यमंत्री के गृह जिले’ में मौजूदा नेताओं से सवाल
खाचरौद का यह प्रदर्शन इसलिए भी राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है क्योंकि उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह जिला है। ऐसे में किसानों के प्रदर्शन ने स्थानीय भाजपा संगठन और मौजूदा जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शन से जुड़े लोगों का सवाल है कि जब किसान लंबे समय से फसल बीमा के भुगतान की समस्या उठा रहे थे, तो स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कितनी प्रभावी पहल हुई? यही सवाल पूर्व विधायक की सक्रियता के साथ भी जोड़ा जा रहा है—जब सत्ता और संगठन के स्तर पर मौजूद नेता किसानों की समस्या उठा सकते थे, तब सड़क पर उतरकर आंदोलन की कमान पूर्व विधायक को ही क्यों संभालनी पड़ी? हालांकि स्थानीय नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया है, यह सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
क्या सड़क पर उतरने के बाद मिलेगा किसानों को हक?
खाचरौद में हुए इस प्रदर्शन ने फसल बीमा व्यवस्था और किसानों को भुगतान में हो रही देरी को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। किसानों की मांग साफ है—नुकसान का सही आकलन हो, पात्रता तय हो और लंबित बीमा राशि जल्द खातों में पहुंचे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 1500 से ज्यादा ट्रैक्टरों के इस शक्ति प्रदर्शन के बाद प्रशासन और बीमा कंपनियां किसानों की मांग पर कितना तेज एक्शन लेती हैं? और दूसरा सवाल स्थानीय सियासत से जुड़ा है—क्या किसानों की इस नाराजगी का असर आने वाले दिनों में खाचरौद की भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर भी दिखाई देगा?













