इंदौर। शहर में सड़क पर गड्ढे की तस्वीरें तो अक्सर सामने आती हैं, लेकिन इस बार मामला एक सरकारी आवास योजना के फ्लैट का है, जहां घर के कमरे में ही अचानक कई फीट गहरा गड्ढा हो गया। घटना गांधीनगर क्षेत्र में सामने आई, जहां रात में परिवार के लोग कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान पलंग हिलने लगा और देखते ही देखते फर्श का हिस्सा नीचे धंस गया।

सोते समय अचानक धंस गई जमीन, पलंग भी नीचे गया
परिवार के मुताबिक घटना के वक्त कृष्ण अपने परिवार के साथ कमरे में सो रहे थे। परिवार में बच्चे और अन्य सदस्य भी मौजूद थे। रात में अचानक पलंग हिलने लगा और कमरे की जमीन धंस गई। जब परिवार ने पलंग हटाकर नीचे देखा तो वहां करीब चार से पांच फीट गहरा गड्ढा दिखाई दिया। गनीमत रही कि घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। लेकिन जिस वक्त फर्श धंसा, उस समय बच्चे और परिवार के सदस्य उसी कमरे में मौजूद थे। ऐसे में हादसे ने पूरे परिवार को दहला दिया।
पास के फ्लैट में भी जमीन के नीचे से आवाजें
मामला सिर्फ एक फ्लैट तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक एक अन्य फ्लैट में भी जमीन के नीचे से आवाजें आने की शिकायत है। संबंधित परिवार ने एहतियातन कमरे से सामान हटाना शुरू कर दिया है।
बताया जा रहा है कि एक फ्लैट के बाथरूम का हिस्सा भी अचानक धंस गया। परिवार में गर्भवती महिला होने के कारण उन्होंने भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
निजी स्तर पर शुरू हुई मरम्मत
फ्लैट में जमीन धंसने की घटना के बाद रहवासियों ने अपने स्तर पर मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक निजी मिस्त्रियों की मदद से दोबारा स्लैब डालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि सरकारी आवास योजना के तहत बनाए गए इन फ्लैटों में निर्माण के बाद इतनी गंभीर स्थिति कैसे पैदा हुई?
गंदगी और बदहाल व्यवस्था के बीच सामने आया बड़ा खतरा
रहवासियों का आरोप है कि इलाके में पहले से ही साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर समस्याएं हैं। अब घर के अंदर जमीन धंसने की घटना ने फ्लैटों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि घटना के बाद फिलहाल किसी प्रशासनिक या नगर निगम अधिकारी के मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने नहीं आई है।
सवालों के घेरे में सरकारी आवास
प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत शहर में जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं। ऐसे में अगर इन आवासों में फर्श और जमीन के नीचे इस तरह की समस्या सामने आती है, तो निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी हो जाती है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग मौके पर पहुंचकर फ्लैटों की तकनीकी जांच कराएगा? क्या आसपास के अन्य फ्लैट भी सुरक्षित हैं? और अगर निर्माण में कोई खामी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय कौन करेगा? फिलहाल रहवासी अपने स्तर पर खतरे से निपटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस घटना के बाद प्रशासन की त्वरित जांच और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत जरूर सामने आई है।













