सतना। प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया यानी PM श्री विद्यालय को बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं का मॉडल माना जाता है, लेकिन सतना जिले के रामपुर बघेलान क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां चोरहटा के पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और निषाद प्रस्थ कॉलोनी प्राथमिक पाठशाला में जलभराव और शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। बारिश के बाद स्कूल परिसर में गंदा पानी जमा होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि लंबे समय से जल निकासी की समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। ऐसे में बच्चों को पानी और कीचड़ के बीच स्कूल पहुंचना और पढ़ाई करना पड़ रहा है।

शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित
ग्रामीणों और विद्यार्थियों का कहना है कि समस्या सिर्फ जलभराव तक सीमित नहीं है। स्कूल में शिक्षकों के कई पद खाली हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। दोनों स्कूलों में करीब 200 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी सीएम हेल्पलाइन और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से शिकायत की, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। आखिरकार विद्यार्थियों और ग्रामीणों को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा।
24 घंटे में पानी निकालो, 15 दिन में शिक्षक दो
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि 24 घंटे के भीतर स्कूल परिसर से जल निकासी की व्यवस्था की जाए और 15 दिनों के भीतर शिक्षकों की कमी पूरी की जाए। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि तय समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
PM श्री स्कूल के नाम पर सवाल
PM श्री विद्यालयों का उद्देश्य बच्चों को बेहतर और आधुनिक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि बारिश के दौरान स्कूल परिसर में गंदा पानी भर जाए और शिक्षक ही पर्याप्त संख्या में उपलब्ध न हों, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं कैसे मिलेंगी? अब देखना होगा कि प्रशासन चोरहटा के स्कूल की जल निकासी और शिक्षकों की कमी को कितनी गंभीरता से लेता है और विद्यार्थियों को राहत कब तक मिलती है। फिलहाल सड़क पर उतरे छात्र और ग्रामीण प्रशासन के जवाब और कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।














