जबलपुर। शहर में नालियों से होकर गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों की जांच में लापरवाही को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। जांच के लिए गठित समिति के अधिकारियों द्वारा न तो मौके का निरीक्षण किया गया और न ही रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए NGT ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेने और आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।30 दिन में देनी होगी जांच रिपोर्टNGT की सेंट्रल जोन बेंच भोपाल ने जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम को निर्देश दिया है कि मौजूदा अधिकारियों के स्थान पर तत्काल सक्षम अधिकारियों को समिति में शामिल किया जाए। नए अधिकारी मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय कर संबंधित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण करेंगे और 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करेंगे।
सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि समिति के सदस्यों को कई बार पत्र भेजकर निरीक्षण और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने न तो जवाब दिया और न ही मौके पर पहुंचे। यहां तक कि बार-बार फोन करने के बाद भी कुछ अधिकारियों ने कॉल का जवाब देना बंद कर दिया।
80 प्रतिशत पाइपलाइन नालियों से गुजरने का दावा
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि जबलपुर में करीब 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही हैं। इनमें कई पाइपलाइन 40 से 50 साल पुरानी और क्षतिग्रस्त बताई गई हैं। इससे पेयजल की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
याचिका में पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदलने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया।
3 नवंबर को अगली सुनवाई
NGT ने इस मामले की जांच के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया है। अब नए अधिकारी मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी।














